सड़क हादसों के पीड़ितों को बड़ी राहत: देरी से क्लेम करने पर अब खारिज नहीं होंगे आवेदन, हाईकोर्ट का फैसला

बिलासपुर। सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले या घायल होने वाले लोगों के परिवारों के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक मानवीय फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि केवल आवेदन करने में देरी होने की वजह से किसी भी पीड़ित का क्लेम (दावा) शुरुआती स्तर पर खारिज नहीं किया जाएगा। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की बेंच के इस आदेश से उन सैकड़ों परिवारों को न्याय की उम्मीद जगी है, जो तकनीकी कारणों से कोर्ट का दरवाजा खटखटाने में लेट हो गए थे।
क्या है मामला? (बैकग्राउंड)
दरअसल, बजाज आलियांज, टाटा एआईजी और ओरिएंटल इंश्योरेंस जैसी कई बड़ी बीमा कंपनियों ने हाईकोर्ट में 40 से ज्यादा याचिकाएं दायर की थीं। कंपनियों का तर्क था कि ‘मोटर व्हीकल एक्ट’ के नियमों के तहत अगर कोई व्यक्ति तय समय सीमा के बाद आवेदन करता है, तो ट्रिब्यूनल को उस पर सुनवाई करने का अधिकार नहीं है। वे चाहते थे कि देरी से आए इन सभी आवेदनों को तुरंत रद्द कर दिया जाए।
कोर्ट की अहम टिप्पणी
हाईकोर्ट ने बीमा कंपनियों के इन तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि न्याय मिलना सबका अधिकार है और केवल ‘समय सीमा’ जैसी तकनीकी उलझनों की वजह से पीड़ितों को उनके हक से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने माना कि हादसों के बाद कई बार परिवार सदमे या अन्य मजबूरियों के कारण तुरंत कोर्ट नहीं पहुंच पाते।
पीड़ितों पर क्या होगा असर?
इस फैसले के बाद अब बीमा कंपनियां समय का हवाला देकर किसी का आवेदन रद्द नहीं करवा सकेंगी। सभी संबंधित दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल (MACT) को निर्देश दिया गया है कि वे इन मामलों की मेरिट पर सुनवाई जारी रखें।
अंतिम फैसले का इंतजार
चूंकि ऐसा ही एक कानूनी मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है, इसलिए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक वहां से कोई अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक ट्रिब्यूनल इन केसों में अपना आखिरी आदेश जारी नहीं करेंगे। हालांकि, सुनवाई चलती रहेगी ताकि पीड़ितों को ज्यादा इंतजार न करना पड़े।



