दिल्ली के लाल किला मैदान में आदिवासियों की हुंकार: छत्तीसगढ़ के CM विष्णुदेव साय बोले- ‘डी-लिस्टिंग’ कानून जरूरी, धर्म बदलने वालों को न मिले आरक्षण

नई दिल्ली/रायपुर। देश की राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक लाल किला मैदान रविवार को एक बड़े ऐतिहासिक आंदोलन का गवाह बना। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के मौके पर जनजातीय सुरक्षा मंच (JSM) ने एक विशाल ‘जनजातीय महा समागम’ का आयोजन किया। इस महासम्मेलन में देशभर से लाखों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग जुटे। कार्यक्रम में सबसे प्रमुख मांग उठी कि जो लोग अपना मूल धर्म बदल चुके हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची से बाहर किया जाए, यानी देश में ‘डी-लिस्टिंग’ कानून तुरंत लागू हो। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी इस आंदोलन को समर्थन देने विशेष रूप से दिल्ली पहुंचे।

हमारी संस्कृति से खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
महासमागम में पहुंचे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मीडिया से बात करते हुए साफ शब्दों में आदिवासियों का पक्ष लिया। उन्होंने कहा, “यह बेहद गर्व की बात है कि देश के कोने-कोने से जनजातीय समाज के लोग दिल्ली में एकजुट हुए हैं। भारत में आदिवासी समाज की आबादी 12 करोड़ से ज्यादा है। मैं खुद इस समाज से आता हूँ। आज हम सब यहाँ अपनी सदियों पुरानी संस्कृति, अनूठी पहचान और रीति-रिवाजों को बचाने के लिए आए हैं।”
सीएम साय ने आगे कहा कि कुछ बाहरी तत्व और विधर्मी लोग लगातार आदिवासी परंपराओं को नुकसान पहुंचाने और उन्हें कुचलने की कोशिश कर रहे हैं। अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। हमारी संस्कृति से खिलवाड़ बंद होना चाहिए और केंद्र सरकार को जल्द से जल्द डी-लिस्टिंग कानून पास करना चाहिए।
आखिर क्या है ‘डी-लिस्टिंग’ की मांग? और क्यों मचा है बवाल?
सरल शब्दों में समझें तो आदिवासी संगठनों का कहना है कि संविधान में आदिवासियों को आरक्षण और विशेष अधिकार उनकी खास संस्कृति, जीवनशैली और परंपराओं को सुरक्षित रखने के लिए दिए गए थे। लेकिन बीते कुछ दशकों में मिशनरियों ने अंचल के भोले-भाले आदिवासियों की गरीबी और अशिक्षा का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर उनका धर्म परिवर्तन करा दिया।
संगठनों का तर्क है कि जब कोई व्यक्ति ईसाई या अन्य धर्म अपनाकर अपनी मूल जड़ों, देवी-देवताओं और रीति-रिवाजों को छोड़ चुका है, तो उसे ST को मिलने वाले आरक्षण का लाभ उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। धर्म बदलने वालों को एसटी लिस्ट से बाहर (Delisting) किया जाना चाहिए ताकि असली आदिवासियों का हक न मारा जाए।
दिल्ली में दिखा आदिवासियों का अब तक का सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन
इस महा रैली की गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है। समागम में हिस्सा लेने के लिए छत्तीसगढ़, झारखंड, गुजरात, ओडिशा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और पूर्वोत्तर राज्यों से लाखों लोग पारंपरिक वेशभूषा और अपने खास वाद्ययंत्रों के साथ दिल्ली पहुंचे थे। दिल्ली की सड़कों पर आदिवासियों का यह हुजूम देखकर आयोजकों का दावा है कि यह हाल के वर्षों का सबसे बड़ा आदिवासी शक्ति प्रदर्शन है। अब देखना होगा कि इस देशव्यापी मांग पर केंद्र सरकार आगे क्या कदम उठाती है।



