ईद-उल-अज़हा पर डॉ. सलीम राज की अपील: खुले में न करें कुरबानी, सामाजिक सौहार्द बनाए रखें…

ईद-उल-अज़हा के पावन अवसर पर मुस्लिम समाज से शांति, स्वच्छता और आपसी भाईचारे के साथ त्योहार मनाने की अपील की गई है। सामाजिक कार्यकर्ता ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि ईद-उल-अज़हा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि त्याग, इंसानियत और भाईचारे का संदेश देने वाला त्योहार है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष ईद-उल-अज़हा 28 मई 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी। प्रदेशभर की मस्जिदों और ईदगाहों में सुबह 6 बजे से 11 बजे तक अलग-अलग समय पर ईद की नमाज अदा की जाएगी। इसके साथ ही 28 मई सूर्योदय से 30 मई सूर्यास्त तक साहिबे-निसाब मुस्लिमों द्वारा कुरबानी की प्रक्रिया की जाएगी।
डॉ. सलीम राज ने कहा कि इस्लाम धर्म और कुरआन शरीफ सभी धर्मों के सम्मान, आपसी मोहब्बत और सामाजिक सौहार्द का संदेश देते हैं। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थलों या खुले क्षेत्रों में कुरबानी न करें और प्रतिबंधित पशुओं की कुरबानी से पूरी तरह बचें।
उन्होंने यह भी कहा कि कई बार कुरबानी के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने से अन्य समाजों की भावनाएं आहत होती हैं और सामाजिक माहौल प्रभावित होता है। ऐसे में त्योहार को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ मनाना बेहद जरूरी है।
डॉ. सलीम राज की प्रमुख अपीलें...
- खुले या सार्वजनिक स्थानों पर कुरबानी न करें
- प्रतिबंधित पशुओं की कुरबानी से बचें
- कुरबानी की फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल न करें
- खून को नालियों में न बहाएं, गड्ढा खोदकर उचित तरीके से दफनाएं
- साफ-सफाई और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें
- सड़कों पर नमाज अदा न करें
- अधिक भीड़ होने पर शिफ्ट/पाली में नमाज की व्यवस्था करें
उन्होंने अंत में कहा कि सभी समाजों की आस्था का सम्मान करते हुए ईद-उल-अज़हा का त्योहार प्रेम, भाईचारे और अमन के साथ मनाया जाना चाहिए, ताकि प्रदेश में सामाजिक सौहार्द और एकता कायम रहे।



