बिना सहमति नहीं होगा दूसरे विभाग में ट्रांसफर, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश पर लगाया स्टे

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण को लेकर एक बेहद अहम कानूनी सिद्धांत स्पष्ट किया है। अदालत ने साफ तौर पर कहा है कि किसी भी कर्मचारी को एक विभाग से दूसरे विभाग में केवल प्रतिनियुक्ति यानी डेपुटेशन के आधार पर ही भेजा जा सकता है और इसके लिए संबंधित कर्मचारी की लिखित सहमति अनिवार्य है। इस महत्वपूर्ण टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने उपनिदेशक लोक अभियोजन विवेक त्रिपाठी के ट्रांसफर आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।
पूरा मामला कोरबा में पदस्थ डिप्टी डायरेक्टर विवेक त्रिपाठी से जुड़ा है जिनका स्थानांतरण शासन ने रायपुर स्थित ईओडब्ल्यू और एसीबी विभाग में कर दिया था। याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय के माध्यम से दलील दी कि अभियोजन और ईओडब्ल्यू अलग-अलग कैडर हैं और बिना सहमति के सीधे ट्रांसफर करना नियमों के विरुद्ध है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए बताया गया कि ईओडब्ल्यू में पद रिक्त न होने के बावजूद यह आदेश जारी किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने स्थानांतरण आदेश को स्थगित कर दिया है जिसे भविष्य में डेपुटेशन से जुड़े मामलों के लिए एक नजीर माना जा रहा है।


