जल जीवन मिशन फेल? बैगा आदिवासी बूंद-बूंद पानी को तरसे, सालभर बाद भी सूखे नल

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। सरकार के ‘हर घर नल से जल’ के दावे के बीच गौरेला विकासखंड की ग्राम पंचायत चुकतीपानी से हकीकत सामने आई है, जहां बैगा आदिवासी आज भी पानी के लिए मीलों भटकने को मजबूर हैं। गर्मी बढ़ते ही हालात और बिगड़ गए हैं और गांव में पीने का पानी बड़ा संकट बन गया है।
सीएम की फटकार बेअसर, अधूरा प्रोजेक्ट बना संकट
मई 2025 में जन चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से पानी की समस्या की शिकायत की थी, जिस पर मौके पर अधिकारियों को फटकार लगाकर समाधान के निर्देश दिए गए थे, लेकिन एक साल बाद भी स्थिति नहीं बदली। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पीएचई विभाग ने क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को नजरअंदाज कर अधूरी और कम गहराई की बोरिंग कर दी, जिससे गर्मी शुरू होते ही जल स्रोत सूख गए। एक ही जगह कई हैंडपंप लगाने से भी समस्या और बढ़ गई है, जबकि अमानानाला से लिफ्ट सिस्टम के जरिए पानी लाने की योजना केवल पाइपलाइन तक सीमित रह गई और आज तक उसमें पानी नहीं पहुंचा।
जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा विभाग, ग्रामीणों में आक्रोश
पीएचई विभाग ने प्रोजेक्ट को फरवरी 2026 में पंचायत को सौंपने की बात कहकर जिम्मेदारी से दूरी बना ली है, जबकि जमीनी हकीकत में लोग पानी के लिए परेशान हैं। विभाग का दावा है कि खामियों को दूर किया जा रहा है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अब तक कोई ठोस समाधान नहीं हुआ। हालात ऐसे हैं कि इंसानों के साथ मवेशियों के लिए भी पानी जुटाना मुश्किल हो गया है। सवाल उठ रहा है कि जब नलों में पानी ही नहीं है, तो योजना का लाभ किसे मिल रहा है।



