प्रशासनिक तत्परता: मुख्यमंत्री की चौपाल के बाद बदला कमराखोल का चेहरा, घोषणाओं पर हफ्ता भर में अमल

रायपुर: सुशासन केवल फाइलों में नहीं बल्कि धरातल पर दिखता है, और कबीरधाम जिले का कमराखोल ग्राम इसका ताज़ा उदाहरण बन गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा 4 मई को सुशासन तिहार के दौरान लगाई गई चौपाल का असर अब गांव की गलियों में नजर आने लगा है। महज कुछ ही दिनों के भीतर जिला प्रशासन ने पेयजल, जल संरक्षण और सामुदायिक सुविधाओं से जुड़ी उन सभी घोषणाओं पर काम शुरू कर दिया है, जिनका वादा मुख्यमंत्री ने बैगा आदिवासियों से किया था।
जनजातीय बाहुल्य इस वनांचल क्षेत्र में विकास की यह रफ्तार प्रशासनिक संवेदनशीलता को दर्शाती है। मुख्यमंत्री साय ने ग्रामीणों की मांग पर मौके पर ही जो घोषणाएं की थीं, उन्हें कबीरधाम जिला प्रशासन ने कागजी औपचारिकता से निकालकर निर्माण कार्य में बदल दिया है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने गांव में पेयजल संकट दूर करने के लिए नलकूप खनन का कार्य युद्ध स्तर पर प्रारंभ कर दिया है।
इसके साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जल प्रबंधन को मजबूती देने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत 12 लाख 15 हजार रुपये के कार्य स्वीकृत किए गए हैं। जिला पंचायत सीईओ के अनुसार, पुराने तालाब के गहरीकरण और पचरी निर्माण से न केवल जल संरक्षण होगा, बल्कि ग्रामीणों के लिए 3249 मानव दिवस का रोजगार भी पैदा होगा। वहीं, गांव की एक पुरानी मांग को पूरा करते हुए पक्के मुक्तिधाम शेड का निर्माण भी शुरू हो गया है।
यह त्वरित कार्रवाई उन 130 बैगा परिवारों के लिए एक बड़ा भरोसा लेकर आई है, जो अब तक बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे थे। एक सजग पत्रकार की नजर से देखें तो यह घटनाक्रम बताता है कि जब सत्ता सीधे जनता के बीच बैठती है, तो दिल्ली या इंदौर जैसे बड़े शहरों के हादसों से इतर, ग्रामीण भारत में विकास का एक नया मॉडल तैयार होता है। मुख्यमंत्री की यह पहल ‘सुशासन’ के दावों को धरातल पर सच साबित कर रही है।



