बंगाल में सत्ता परिवर्तन का दिन: एक तरफ सुवेंदु का शपथ ग्रहण, दूसरी ओर ममता की ‘रवींद्र वंदना’

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन ऐतिहासिक और बेहद अहम माना जा रहा है। एक ओर कोलकाता का ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड भाजपा की पहली सरकार के शपथ ग्रहण समारोह का गवाह बनेगा, वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कालीघाट स्थित अपने आवास पर रवींद्र जयंती कार्यक्रम के जरिए राजनीतिक और सांस्कृतिक संदेश देने की तैयारी में हैं।

भाजपा विधायक दल के नेता चुने गए सुवेंदु अधिकारी शनिवार सुबह मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की संभावना है। भाजपा इसे बंगाल में राजनीतिक बदलाव की नई शुरुआत के रूप में पेश कर रही है।
दूसरी तरफ विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी पहली बार किसी औपचारिक सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आएंगी। कालीघाट स्थित आवास पर आयोजित रवींद्र जयंती कार्यक्रम में अभिषेक बनर्जी समेत तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन और राज्यसभा सांसद बाबुल सुप्रियो की संगीत प्रस्तुति की भी चर्चा है।
तृणमूल कांग्रेस ने राज्यभर के कार्यकर्ताओं को रवींद्र जयंती मनाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि पार्टी के भीतर यह स्वीकार किया जा रहा है कि सत्ता से बाहर होने के बाद पहले जैसी राजनीतिक और प्रशासनिक भव्यता अब नजर नहीं आ रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी का यह आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है। भाजपा जहां “मोदी के सपनों का बंगाल” बनाने का दावा कर रही है, वहीं ममता बनर्जी रवींद्रनाथ टैगोर की विरासत के जरिए अपनी वैचारिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ममता बनर्जी इस मंच से पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए नए राजनीतिक संघर्ष और भविष्य की रणनीति का संकेत देंगी।



