सीजफायर के बाद भारत सतर्क, होर्मुज में फंसे जहाजों को निकालने की कवायद तेज

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच घोषित सीजफायर के तुरंत बाद भारत ने सक्रियता बढ़ाते हुए ईरान से संपर्क साधा है। सरकार का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में फंसे भारतीय तेल और गैस से जुड़े जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालना है। भारत ने युद्ध विराम का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में सकारात्मक पहल होगी।
विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि भारत इस युद्ध विराम का स्वागत करता है और मानता है कि संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही किसी भी संघर्ष का स्थायी समाधान संभव है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि जारी संघर्ष के कारण पहले ही लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।
ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता कम होने की उम्मीद
सरकारी सूत्रों के अनुसार, सीजफायर के बाद भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बनी चिंता में कमी आने की संभावना है। फिलहाल भारत के 16 जहाज होर्मुज के पश्चिमी क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिनमें अधिकांश तेल और गैस से संबंधित हैं। इन जहाजों में करीब दो लाख टन से अधिक एलपीजी मौजूद है, जो देश की जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है।
इन जहाजों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ईरान के साथ लगातार संपर्क में है। भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 85 प्रतिशत जरूरत आयात के जरिए पूरी करता है, जिसमें पश्चिम एशिया की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत है। ऐसे में होर्मुज क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्थिरता देश की ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालती है।
कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रियता
इस बीच भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी अमेरिका दौरे पर हैं और वाशिंगटन में ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। यह दौरा 8 से 11 अप्रैल तक प्रस्तावित है, जिसमें पश्चिम एशिया की स्थिति पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
वहीं विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी इस सप्ताहांत संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा पर जाएंगे। इसे क्षेत्रीय देशों के साथ संपर्क मजबूत करने और स्थिरता सुनिश्चित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
सीजफायर के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सामान्य होगी और वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौटेगी, जिससे भारत जैसे आयातक देशों को राहत मिल सकती है।

