गंगालूर पोर्टा केबिन मामले पर विधानसभा में हंगामा, चर्चा नहीं होने पर विपक्ष का बहिर्गमन

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में सोमवार को शून्यकाल के दौरान बीजापुर जिले के गंगालूर स्थित पोर्टा केबिन में छात्राओं के गर्भवती होने के मामले को लेकर विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव लाया। हालांकि, प्रस्ताव अस्वीकार किए जाने और सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि नाबालिग छात्राओं, विशेषकर आदिवासी लड़कियों, के साथ इस तरह की घटनाएं लंबे समय से सामने आती रही हैं, लेकिन दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने पूरे कामकाज को स्थगित कर इस विषय पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग की।
विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि मामले में 11वीं और 12वीं कक्षा की छात्राएं प्रभावित हुई हैं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने आरोप लगाया कि दोनों छात्राओं को छात्रावास से बाहर कर दिया गया है और प्रशासन मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है।
विधायक संगीता ने कहा कि वह वर्ष 2024 में जांच समिति के साथ पोर्टा केबिन गई थीं और यह मामला बेहद गंभीर है। विधायक कवासी लखमा ने कहा कि बस्तर के पोर्टा केबिन की यह घटना दर्दनाक है और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ने के लिए भेजते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
विधायक अनिला भेड़िया ने कहा कि जब अधीक्षिका से जुड़ी गंभीर बातें सामने आती हैं, तो उन्हें केवल हटाकर मामले को शांत करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि यह आदिवासी बच्चियों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है और इस पर सदन में चर्चा होनी चाहिए।
विधायक देवेंद्र यादव ने कहा कि बच्चियों के साथ गलत कृत्य को छिपाने की कोशिश शर्मनाक है और इस विषय पर चर्चा जरूरी है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि पोर्टा केबिन से जुड़े ऐसे मामले नए नहीं हैं, बल्कि वर्षों से सामने आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चियों की मौत के पीछे भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं, इसलिए पूरे मामले पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
इस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी आरोपी को बचाया नहीं जा रहा है। मंत्री के अनुसार, संबंधित बच्चियां वर्तमान में पोर्टा केबिन में नहीं पढ़ रही हैं और परिजनों ने भी बताया है कि उनका आना-जाना स्वयं के स्तर पर होता था। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी गंभीर घटना में लीपापोती नहीं करती और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि पोर्टा केबिन कलेक्टर की देखरेख में संचालित होता है और प्रशासन की लगातार निगरानी रहती है। उन्होंने बताया कि मामला संदिग्ध है और स्थानीय कलेक्टर के निर्देश पर जांच जारी है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। आसंदी द्वारा स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य किए जाने के बाद विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन किया।


