छत्तीसगढ़ में बिजली-पानी पर हाहाकार: दीपक बैज ने साय सरकार को घेरा, तीन गुना बिजली बिल और स्मार्ट मीटर के खिलाफ बड़े आंदोलन का ऐलान

रायपुर: छत्तीसगढ़ में बिजली-पानी पर हाहाकार: दीपक बैज ने साय सरकार को घेरा, तीन गुना बिजली बिल और स्मार्ट मीटर के खिलाफ बड़े आंदोलन का ऐलान उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में जब से स्मार्ट मीटर (Smart Meter Chhattisgarh) लगाए गए हैं, तब से जनता का खून चूसा जा रहा है। लोगों के बिजली बिल तीन गुना तक बढ़ गए हैं। दीपक बैज ने साफ चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने बिजली-पानी की स्थिति नहीं सुधारी, तो कांग्रेस पूरे प्रदेश में एक बड़ा जन आंदोलन खड़ा करेगी।
जनता को आ रहा तीन गुना बिजली बिल, सरकार हर मोर्चे पर फेल
दीपक बैज ने बिजली विभाग पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में उपभोक्ताओं की वास्तविक खपत से कहीं ज्यादा की रीडिंग दिखाई जा रही है। इस महीने भीषण गर्मी में लोगों के घरों का बजट बिगड़ गया है क्योंकि बिजली बिल तीन गुना (3 Times Higher Electricity Bill) होकर आ रहे हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि, जब उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार खुद अपने यहाँ स्मार्ट मीटर के फैसले को वापस ले चुकी है, तो फिर छत्तीसगढ़ की जनता पर यह बोझ क्यों लादा जा रहा है? साय सरकार को इसे तुरंत हटाना चाहिए। भाजपा सरकार हर मोर्चे पर पूरी तरह विफल साबित हुई है।
सरप्लस’ राज्य में अघोषित बिजली कटौती से जनता बेहाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि छत्तीसगढ़ कभी सरप्लस बिजली (Surplus Power State) वाला राज्य कहलाता था, लेकिन आज यहाँ अघोषित बिजली कटौती का दौर चल रहा है। शहर हो या गांव, ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब दो से चार घंटे तक बत्ती गुल न होती हो। रात के समय तो हालात और भी बदतर हो जाते हैं। लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग की वजह से लोग गर्मी में रात-रात भर सो नहीं पा रहे हैं। भाजपा से न तो सरकार संभल रही है और ना ही बिजली की व्यवस्था।
ठप पड़ा है जल जीवन मिशन, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग
बिजली के साथ-साथ दीपक बैज ने पेयजल संकट (Water Crisis in Chhattisgarh) का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में इस वक्त पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है। कांग्रेस सरकार के समय ग्रामीण इलाकों में घर-घर नल पहुंचाने के लिए ‘जल जीवन मिशन’ (Jal Jeevan Mission CG) पर तेजी से काम चल रहा था। लेकिन जैसे ही राज्य में सत्ता बदली, इन सभी पेयजल परियोजनाओं की रफ्तार पूरी तरह थम गई है। आज आधी अधूरी पाइपलाइनों के कारण लोग बूंद-बूंद पानी के लिए टैंकरों के भरोसे बैठे हैं।



