लोकसभा में बरसे राहुल गांधी: केंद्र सरकार पर लगाया ‘डेटा सरेंडर’ और अमेरिकी दबाव का आरोप

नई दिल्ली। लोकसभा में आज नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सदन में भाषण देते हुए केंद्र सरकार और अमेरिका पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अमेरिका के दबाव में केंद्र सरकार ने ट्रेड डील की है और भविष्य में अगर भारत उसकी शर्तों को नहीं मानेगा तो अमेरिका टैरिफ बढ़ा देगा। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की नजर भारत के डेटा पर है।
राहुल गांधी ने कहा, “मैं इकोनॉमिक सर्वे देख रहा था और उसमें कुछ ठोस बातें आईं, पहली यह कि हम एक ऐसी दुनिया में रह रहे हैं जहां जियोपॉलिटिकल टकराव बढ़ रहा है और अमेरिका के दबदबे को चीन, रूस जैसी ताकतें चुनौती दे रही हैं। दूसरी बात यह है कि हम एनर्जी और फाइनेंशियल हथियारों की दुनिया में रह रहे हैं।” राहुल ने कहा कि हम अस्थिरता की दुनिया में जा रहे हैं, जहां यूक्रेन, गाजा, मिडल ईस्ट, और ईरान में युद्ध हो रहे हैं।
उन्होंने कहा, “हम युद्ध के दौर में जी रहे हैं और अमेरिकी डॉलर को चुनौती दी जा रही है। अगर अमेरिका को सुपरपावर बने रहना है तो उसे भारतीय डेटा की जरूरत है। भारतीय डेटा ही वह संपत्ति है जो अमेरिकी डॉलर को बचा सकती है।”
राहुल गांधी ने कहा, “हम ट्रंप के नौकर नहीं हैं। यदि INDIA अलायंस ट्रंप से बातचीत कर रहा होता, तो हम उन्हें साफ बताते कि भारतीय डेटा उनके डॉलर को बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।” उन्होंने आगे कहा कि भारतीय ऊर्जा सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है और हम अपने किसानों की भी रक्षा करेंगे।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि भारत को पाकिस्तान के बराबर नहीं माना जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने भारत के डेटा के साथ समझौता किया है, जिसमें डिजिटल ट्रेड रूल्स पर नियंत्रण छोड़ दिया गया है और डेटा लोकलाइजेशन की आवश्यकता को खत्म कर दिया गया है।
राहुल गांधी ने अंत में कहा कि सरकार ने अमेरिका के साथ ऐसी डील की है, जो भारत की डिजिटल संपत्तियों और डेटा को कमजोर कर रही है।



