अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा, नए हवाई हमलों के बाद पश्चिम एशिया में हाई अलर्ट

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को बातचीत में देरी की कीमत चुकाने की चेतावनी दिए जाने के बाद अमेरिका ने गुरुवार तड़के ईरान के कई ठिकानों पर नए हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है।
लगातार बढ़ते हमलों के बीच पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं गहरा गई हैं। दो महीने पुराने युद्धविराम के बावजूद दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता नजर आ रहा है।
अमेरिकी हमलों में सैन्य ठिकाने बने निशाना
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक ताजा हवाई हमलों में ईरान की सैन्य निगरानी क्षमता, संचार नेटवर्क और वायु रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार तेहरान, बंदर अब्बास और दक्षिणी तटीय इलाकों में कई विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। हालांकि हमलों से हुए नुकसान को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में सुरक्षा बढ़ी
ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कुवैत ने संभावित खतरे को देखते हुए अपना हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद कर दिया।
कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का रूट भी बदला गया है। बहरीन और जॉर्डन में भी हाई अलर्ट जारी किया गया है और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी चिंता
ईरान ने साफ कर दिया है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर अपनी रणनीतिक पकड़ बनाए रखेगा। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है।
वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ गई है और कच्चे तेल की कीमतों में भी उछाल देखा जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र में ईरान का बयान
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने कहा कि यदि अमेरिका वास्तव में समझौता चाहता है तो उसे धमकियों और सैन्य दबाव की नीति छोड़नी होगी।
उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी तरह के दबाव में बातचीत नहीं करेगा और अपनी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर समझौता नहीं करेगा।
कूटनीतिक प्रयास जारी
तनाव के बीच बातचीत की संभावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी परामर्श के बाद कतर का एक प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचा है।
दोनों पक्षों के बीच वार्ता को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि यूरेनियम संवर्धन, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और जब्त संपत्तियों की रिहाई जैसे मुद्दों पर अब भी बड़ा मतभेद बना हुआ है।
वैश्विक बाजारों की बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं संभले तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है।
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