दल्ली राजहरा हादसा: 3 मजदूरों की मौत के बाद BSP का बड़ा एक्शन; DGM और AGM निलंबित, लापरवाही ने छीनी थीं तीन जिंदगी

बालोद: छत्तीसगढ़ के दल्ली राजहरा में सीवरेज लाइन विस्तार के दौरान हुए भीषण हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। 12 मई को मिट्टी धंसने से हुई तीन मजदूरों की मौत के मामले में भिलाई स्टील प्लांट (BSP) प्रबंधन ने बड़ी कार्रवाई की है। इस जघन्य लापरवाही के आरोप में प्रबंधन ने दो बड़े अधिकारियों, डीजीएम मंगेश सेलकर और एजीएम (सिविल) रमेश कुमार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।
मिट्टी के ढेर में दफन हो गईं तीन सांसें
घटना दल्ली राजहरा थाना क्षेत्र के फुटबॉल ग्राउंड के पास की है। यहाँ दास पान ठेले के सामने बीएसपी की सीवरेज पाइपलाइन बिछाने का काम चल रहा था। जेसीबी और चेन माउंट मशीनों से गहरी खुदाई की गई थी। काम के दौरान अचानक ऊपर से मिट्टी का एक बड़ा हिस्सा भरभरा कर नीचे गिर गया। गड्ढे में काम कर रहे मजदूर किशुन कुमार (54), राकेश कुमार (28) और बैशाखिन (50) मलबे में बुरी तरह दब गए। जब तक उन्हें बाहर निकाला गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
सुरक्षा के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति!
हादसे के बाद जो सच सामने आया, वो बेहद डराने वाला है। आरोप है कि मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा हेलमेट, बेल्ट या गहरे गड्ढे में जरूरी बैरिकेडिंग के ही नीचे उतार दिया गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर मिट्टी धंसने से बचाव के लिए जरूरी ‘शटरिंग’ का इस्तेमाल किया जाता, तो शायद आज ये तीन मजदूर जिंदा होते। मजदूरों की सुरक्षा को ताक पर रखकर काम कराना ही इस मौत का सबसे बड़ा कारण बना।
परिजनों का गुस्सा और पुलिस की जांच
हादसे के बाद गुस्साए परिजनों और स्थानीय लोगों ने बीएसपी अस्पताल के सामने जमकर प्रदर्शन किया था। लोग दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर अड़ गए थे। दबाव बढ़ता देख प्रबंधन ने दोनों अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश जारी किया। इधर, पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की तकनीकी जांच की जा रही है और रिपोर्ट आते ही दोषियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सस्पेंशन ही काफी है या इन परिवारों को इंसाफ दिलाने के लिए कानूनी कार्रवाई भी होगी, अब सबकी नजर इसी पर है।



