प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर छत्तीसगढ़ सरकार सख्त: कॉपी-किताब और यूनिफॉर्म के नाम पर लूट रोकने के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर कमेटियां गठित

रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्राइवेट स्कूलों (Private Schools) द्वारा पालकों से की जा रही मनमानी वसूली और किसी खास दुकान से ही किताब-यूनिफॉर्म खरीदने के दबाव पर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने ऐसी शिकायतों का तुरंत निपटारा करने के लिए जिला और विकासखंड (ब्लॉक) स्तर पर विशेष निगरानी एवं जांच समितियों का गठन कर दिया है। शासन के संज्ञान में यह बात आई थी कि कुछ अशासकीय स्कूल पालकों को एक ही विशेष फर्म या दुकान से महंगी शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं, जिससे अभिभावकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा था। इस मुद्दे को लेकर लगातार खबरें भी सामने आ रही थीं।
कलेक्टर और एसडीएम संभालेंगे कमान, कमेटियों में जीएसटी अफसर भी शामिल
स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने बताया कि इन शिकायतों पर तुरंत और असरदार कार्रवाई करने के लिए दो स्तरों पर कमेटियां बनाई गई हैं:
- जिला स्तरीय निगरानी समिति: इसमें खुद जिले के कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और सहायक आयुक्त जीएसटी (GST Assistant Commissioner) को शामिल किया गया है।
- विकासखंड (ब्लॉक) स्तरीय जांच दल: इसमें अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (SDM), विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) और जीएसटी इंस्पेक्टर को सदस्य बनाया गया है।
कमेटियों में जीएसटी अधिकारियों को रखने का साफ मतलब है कि स्कूलों और दुकानों के बीच होने वाले कमिशन के खेल और टैक्स चोरी पर भी अब सीधे प्रशासनिक चाबुक चलेगा।
फीस बढ़ोतरी पर भी कड़ा एक्शन, 2020 के कानून के तहत होगी कार्रवाई
फीस पर भी लगाम: केवल कॉपी-किताब ही नहीं, बल्कि प्राइवेट स्कूलों द्वारा हर साल अपनी मर्जी से बढ़ाई जाने वाली फीस पर भी सरकार ने शिकंजा कस दिया है।
स्कूल शिक्षा विभाग ने साफ किया है कि फीस बढ़ोतरी से जुड़ी शिकायतों पर प्रशासन अब सीधे ‘स्वतः संज्ञान’ (Suo Motu) लेगा। इसके लिए ‘छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन विधेयक-2020’ के कड़े प्रावधानों के तहत दोषी स्कूलों के खिलाफ आवश्यक और सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दे दिए गए हैं।


