भवन विहीन आंगनबाड़ी केंद्रों को लेकर सरकार का बड़ा फैसला: अब सरकारी स्कूलों के खाली कमरों में चलेंगे केंद्र, कलेक्टरों को निर्देश जारी
रायपुर।
छत्तीसगढ़ में अब किराए के या जर्जर भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों को अपना नया और सुरक्षित ठिकाना मिलने जा रहा है। राज्य शासन ने भवन विहीन आंगनबाड़ी केंद्रों के सुचारू संचालन और बच्चों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए एक सराहनीय कदम उठाया है। सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि स्कूलों के युक्तियुक्तकरण (रैशनलाइजेशन) के बाद जो भी सरकारी स्कूल परिसर या कमरे खाली या अनुपयोगी पड़े हैं, उनका इस्तेमाल तुरंत इन आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन के लिए किया जाए।
मुख्य सचिव की बैठक के बाद स्कूल शिक्षा विभाग का एक्शन
यह फैसला मुख्य सचिव द्वारा 14 मई 2026 को ली गई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद आया है। मुख्य सचिव के निर्देशों का पालन करते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। आदेश के मुताबिक, जिन आंगनबाड़ी केंद्रों के पास खुद की सरकारी बिल्डिंग नहीं है, उन्हें उनके सबसे पास मौजूद स्कूल परिसर के खाली कमरों में शिफ्ट (सह-स्थान के आधार पर) करने की मंजूरी तुरंत दी जाएगी।
बच्चों को मिलेगा सुरक्षित माहौल, संसाधनों का होगा सही इस्तेमाल
इस नई व्यवस्था से दो बड़े फायदे होंगे। पहला यह कि आंगनबाड़ी में आने वाले छोटे बच्चों को पढ़ाई और खेलकूद के लिए एक सुरक्षित, व्यवस्थित और अच्छा माहौल मिल सकेगा। दूसरा, शासन के जो भवन या संसाधन फिलहाल खाली और बेकार पड़े थे, उनका सही और बेहतर इस्तेमाल हो पाएगा।
कलेक्टरों को प्राथमिकता के आधार पर काम करने के निर्देश
राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टर्स को हिदायत दी है कि वे महिला एवं बाल विकास विभाग और स्कूल शिक्षा विभाग के बीच आपसी तालमेल बिठाएं। जिला स्तर पर एक सर्वे कराकर ऐसे स्कूलों और खाली कमरों की पहचान की जाए और प्राथमिकता के आधार पर भवन विहीन आंगनबाड़ियों को ये कमरे अलॉट (आबंटित) किए जाएं, ताकि बच्चों की पढ़ाई और पोषण व्यवस्था में कोई बाधा न आए।



