दुखों का पहाड़ भी नहीं रोक सका रास्ता: पीठ की चोट और पारिवारिक त्रासदी को मात देकर इसाक ने खेलो इंडिया में जीता सोना

रायपुर। मिजोरम के युवा वेटलिफ्टर इसाक मालसावमटलुआंगा ने कठिन परिस्थितियों को पार करते हुए खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। माता-पिता दोनों को कम उम्र में खोने के बाद वह खेल छोड़ने की कगार पर पहुंच गए थे, लेकिन परिवार और कोच के सहयोग से उन्होंने शानदार वापसी की।
18 वर्षीय इसाक ने पीठ की तकलीफ के बावजूद बेहतरीन प्रदर्शन किया। स्नैच में दूसरे स्थान पर रहने के बाद उन्होंने क्लीन एंड जर्क में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 235 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
इसाक के पिता हेमिंग मालसावमटलुआंगा का 2018 में सड़क दुर्घटना में निधन हो गया था। उसी वर्ष उन्होंने वेटलिफ्टिंग की शुरुआत की थी। परिवार के इकलौते बेटे होने के कारण उनके सामने खेल जारी रखने या परिवार की जिम्मेदारी संभालने का कठिन निर्णय था। इस दौरान उनके बचपन के कोच ने उन्हें खेल जारी रखने के लिए प्रेरित किया।
2024 में यूथ नेशनल चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने के बाद उनका प्रदर्शन बेहतर हो रहा था, लेकिन इसी दौरान उनकी मां को कैंसर हो गया और बाद में उनका निधन हो गया। इस घटना ने इसाक को गहरा आघात पहुंचाया और वह कुछ समय के लिए खेल से दूर होने लगे।
इस कठिन समय में उनके चाचा और चाची ने उनका सहारा बनकर उन्हें संभाला। उन्होंने इसाक की पढ़ाई और प्रशिक्षण दोनों जारी रखने में मदद की। वर्तमान में इसाक इम्फाल स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में प्रशिक्षण ले रहे हैं और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय के माध्यम से कक्षा 12 की पढ़ाई कर रहे हैं।
लगातार संघर्ष के बीच इसाक ने 2025 में जूनियर प्रतियोगिता में रजत और राष्ट्रीय वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक भी जीता। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स से पहले अभ्यास के दौरान पीठ में चोट लगने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और रायपुर में अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।
स्वर्ण पदक जीतने के बाद उनके चाचा ने उन्हें गले लगाकर खुशी जाहिर की। इसाक ने कहा कि उनके चाचा और कोच के सहयोग ने ही उन्हें मुश्किल दौर से बाहर निकालकर इस मुकाम तक पहुंचाया।


