बंदूक छोड़ अब ट्रैक पर किस्मत आजमाएंगे पूर्व माओवादी: बस्तर मैराथन बना ‘पूना मारगेम’ अभियान का नया अध्याय

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर में 22 मार्च 2026 को बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026 का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति और खेल भावना का अनूठा संगम होगा। मैराथन की शुरुआत जगदलपुर के लालबाग मैदान से होगी और समापन एशिया के नियाग्रा कहे जाने वाले चित्रकोट जलप्रपात पर होगा। प्रतियोगिता में देशभर के धावक भाग ले सकेंगे और कुल 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि रखी गई है।
इस मैराथन में 42 किलोमीटर, 21 किलोमीटर, 10 किलोमीटर और 5 किलोमीटर की अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित की गई हैं, ताकि हर स्तर के प्रतिभागियों को अवसर मिल सके। बस्तर संभाग के धावकों के लिए विशेष पुरस्कार की व्यवस्था भी की गई है। स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए बस्तर जिले के धावकों के लिए पंजीकरण निःशुल्क रखा गया है।
इस आयोजन की सबसे खास बात यह है कि इसमें आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे पूर्व माओवादी भी भाग ले रहे हैं। कभी हिंसा के रास्ते पर रहे ये युवा अब खेल के माध्यम से नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। दंतेवाड़ा के ‘लोन वर्राटू’ और ‘पूना मारगेम’ जैसे पुनर्वास अभियानों के जरिए इन युवाओं को समाज से जोड़ने का प्रयास किया गया है, जिसका सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहा है।
प्रशिक्षण सत्रों में इन युवाओं का उत्साह और प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन प्रतिभागियों में बेहतर शारीरिक क्षमता और दृढ़ संकल्प है, जिसे पेशेवर प्रशिक्षण के जरिए और निखारा जा रहा है। महिला प्रतिभागियों ने भी इस पहल को सराहा है और बताया कि अब उन्हें समाज में सम्मान और सुरक्षा का अनुभव हो रहा है।
विदेशी और स्थानीय प्रतिभागियों की भागीदारी के साथ यह आयोजन बस्तर की सकारात्मक छवि को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह मैराथन केवल खेल आयोजन नहीं, बल्कि शांति, विश्वास और विकास का प्रतीक बनकर उभर रही है।
आयोजकों के अनुसार, इच्छुक प्रतिभागी आधिकारिक वेबसाइट www.bastarheritage.run या जारी क्यूआर कोड के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर +91-92440-79533 भी जारी किया गया है।
बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026 में सुकमा, नारायणपुर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, कांकेर और कोंडागांव जिलों से 200 से अधिक पुनर्वासित माओवादी कैडर भाग ले रहे हैं। उनके साथ पेशेवर एथलीट, युवा, छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में आम नागरिक भी शामिल होंगे।
यह आयोजन बस्तर में बदलते माहौल की तस्वीर पेश करता है, जहां अब हिंसा की जगह उम्मीद, खेल और विकास की नई राह दिखाई दे रही है।



