वर्ष 2026 में होने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण: खगोलीय जानकारी और महत्वपूर्ण तथ्य

नई दिल्ली। साल 2026 में होने वाली खगोलीय घटनाओं में सूर्य ग्रहण को विशेष माना जा रहा है। हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है। इसी कारण ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ, खानपान और अन्य दैनिक कार्यों को लेकर कई परंपराओं का पालन किया जाता है। ऐसे में लोग यह जानना चाहते हैं कि साल का अगला सूर्य ग्रहण कब लगेगा, उसका समय क्या रहेगा और क्या उसका प्रभाव भारत में माना जाएगा।
साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा। यह ग्रहण भारतीय समयानुसार रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगा। खगोलीय जानकारी के अनुसार यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल में किसी भी नए और शुभ कार्य की शुरुआत नहीं की जाती। इस दौरान लोग देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श करने से बचते हैं और बाहरी पूजा-पाठ के बजाय मन ही मन मंत्र जाप करते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान, घर की सफाई और पूजा-अर्चना की परंपरा भी निभाई जाती है।
मान्यता है कि ग्रहण के समय गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र और सूर्य मंत्र का जाप शुभ फलदायी होता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद गंगाजल मिलाकर स्नान करना, घर और मंदिर में गंगाजल का छिड़काव करना तथा देसी घी का दीपक जलाकर भगवान सूर्य की पूजा करना शुभ माना जाता है। जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करने की भी परंपरा है।
ग्रहण के दौरान भोजन न करने, धारदार वस्तुओं का उपयोग न करने, तुलसी के पत्ते न तोड़ने और वाद-विवाद से दूर रहने जैसी मान्यताएं भी प्रचलित हैं। हालांकि चूंकि 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां धार्मिक दृष्टि से सूतक काल प्रभावी नहीं माना जाएगा।
सूर्य ग्रहण को लेकर लोगों में हमेशा उत्सुकता बनी रहती है, लेकिन इसे देखने के दौरान वैज्ञानिक सावधानियां भी जरूरी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रहण को बिना सुरक्षित उपकरण के सीधे नहीं देखना चाहिए।



