शेयर बाजार में कोहराम: दुनिया की टॉप-100 कंपनियों से बाहर हुईं भारतीय दिग्गज, रिलायंस-TCS को लगा बड़ा झटका

मुंबई/नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार से इस वक्त निवेशकों को डराने वाली खबर सामने आ रही है। पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव, डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने बाजार की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि इस साल सेंसेक्स करीब 12 फीसदी और निफ्टी 10 फीसदी तक टूट चुका है। इसी बीच आई ब्लूमबर्ग की एक ताजा रिपोर्ट ने भारतीय निवेशकों की रातों की नींद उड़ा दी है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, मार्केट कैप (Market Capitalization) के लिहाज से अब दुनिया की टॉप-100 कंपनियों की लिस्ट में एक भी भारतीय कंपनी का नाम शामिल नहीं है। जबकि साल 2025 की शुरुआत तक भारत की तीन बड़ी कंपनियां इस एलीट लिस्ट का हिस्सा हुआ करती थीं।
टॉप-100 की रेस से बाहर हुईं रिलायंस और टीसीएस
कुछ समय पहले तक दुनिया के बड़े बाजारों को टक्कर देने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL), एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) और टीसीएस (TCS) अब टॉप-100 की रैंकिंग से बाहर हो चुकी हैं। देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज साल 2025 की शुरुआत में 57वें और 2026 की शुरुआत में 73वें नंबर पर थी, लेकिन बाजार में मची बिकवाली के कारण अब यह फिसलकर सीधे 106वें स्थान पर आ गई है।
इंफोसिस, एसबीआई और आईटीसी का भी बुरा हाल
बाजार में आई इस गिरावट की मार अन्य बड़ी कंपनियों पर भी पड़ी है। दिग्गज आईटी कंपनी इंफोसिस जो कभी 198वें नंबर पर थी, वह अब खिसककर वैश्विक स्तर पर 590वें स्थान पर पहुंच गई है। वहीं, सिगरेट से लेकर होटल कारोबार चलाने वाली आईटीसी (ITC) भी 702वें नंबर पर आ गई है। इसके अलावा देश के बड़े बैंकिंग शेयर जैसे आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) भी अपनी पुरानी रैंकिंग गंवाकर क्रमशः 274वें और 276वें स्थान पर पहुंच गए हैं।
विदेशी निवेशकों ने देश से निकाले 2.20 लाख करोड़ रुपये
बिकवाली का रिकॉर्ड: इस महागिरावट की सबसे बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा की जा रही ताबड़तोड़ बिकवाली है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2026 से लेकर मई 2026 तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 2.20 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। केवल अप्रैल के महीने में ही इन्होंने 60,847 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।
बाजार के जानकारों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर मची उथल-पुथल के कारण विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से अपना पैसा सुरक्षित निकाल रहे हैं, जिससे घरेलू निवेशकों को तगड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है।



