नारायणपुर के दुर्गम अबूझमाड़ में सुशासन की दस्तक: लंका गांव में पहली बार लगा जिला स्तरीय शिविर, मौके पर ही सुलझे सैकड़ों मामले

रायपुर, 25 अप्रैल 2026: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के ‘सुशासन’ के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए नारायणपुर जिला प्रशासन ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। जिले के अत्यंत सुदूर और ओरछा विकासखंड के दुर्गम छोर पर स्थित लंका गांव में दो दिवसीय विशेष शिविर का आयोजन किया गया। यह आयोजन इस मायने में ऐतिहासिक रहा कि आजादी के बाद पहली बार प्रशासन की टीम इंद्रावती नदी पार कर इस नक्सल प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों के द्वार तक पहुंची।
दुर्गम रास्तों को पार कर ग्रामीणों के द्वार पहुंचा प्रशासन
जिला मुख्यालय से करीब 130 किलोमीटर दूर, पहाड़ों और नदी-नालों से घिरे लंका गांव तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं था। कलेक्टर नम्रता जैन के मार्गदर्शन में प्रशासनिक टीम ने इन कठिन बाधाओं को पार कर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। शिविर का उद्देश्य केवल आवेदन लेना नहीं, बल्कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना रहा। ग्रामीणों ने पहली बार अपने गांव में इतने बड़े स्तर पर अधिकारियों को देख खुशी जाहिर की।
‘सुशासन एक्सप्रेस’ ने रचा कीर्तिमान: मौके पर ही बने 27 प्रकार के दस्तावेज
शिविर में सबसे अधिक चर्चा ‘सुशासन एक्सप्रेस’ की रही। वाई-फाई और आधुनिक तकनीक से लैस इस मोबाइल वाहन ने ग्रामीणों के लिए डिजिटल सेतु का काम किया। इसके माध्यम से आधार कार्ड, जाति, निवास और आय प्रमाण पत्र जैसे 27 महत्वपूर्ण दस्तावेज तत्काल तैयार कर वितरित किए गए। अब तक सुशासन एक्सप्रेस के जरिए रिकॉर्ड 17,520 आवेदनों का निराकरण किया जा चुका है, जिससे ग्रामीणों को अब दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिल गई है।
शिविर में आवेदनों का अंबार, नियद नेल्लानार योजना से बढ़ रहा विश्वास
दो दिनों तक चले इस विशेष शिविर में लंका और आसपास के पांच गांवों के ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कुल प्राप्त 310 आवेदनों में से 242 का मौके पर ही निराकरण किया गया। इसमें पीएम किसान सम्मान निधि (179), मनरेगा जॉब कार्ड (34) और राशन कार्ड (25) से संबंधित मामले प्रमुख रहे। कलेक्टर नम्रता जैन ने कहा कि ‘नियद नेल्लानार योजना’ के तहत अबूझमाड़ के भीतर तक पहुंचना शासन की प्राथमिकता है। इसी क्रम में आगामी 29 और 30 अप्रैल को आदनार में विशेष शिविर लगाया जाएगा, जिससे मलमेटा, कोंजे और बोडुम के ग्रामीण लाभान्वित होंगे।



