धान खरीदी की अवधि बढ़ने से किसानों को मिली बड़ी राहत, बस्तर संभाग में दो दिनों में हुई रिकॉर्ड खरीदी

जगदलपुर। धान खरीदी की निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी प्रदेश के लाखों किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह गए थे। किसानों की व्यापक मांग और जमीनी परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने धान खरीदी की अवधि दो दिन के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया। सरकार के इस किसान हितैषी फैसले से विशेष रूप से बस्तर संभाग के किसानों को बड़ी राहत मिली है, जिससे सैकड़ों किसान अपनी उपज बेचने में सफल रहे।
बस्तर संभाग के सात जिलों में इन अतिरिक्त दो दिनों के दौरान धान खरीदी की व्यापक गतिविधि देखी गई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, संभाग में कुल 83,255.23 मीट्रिक टन धान की अतिरिक्त खरीदी दर्ज की गई है। इसमें सर्वाधिक योगदान कांकेर जिले का रहा, जहां किसानों ने लगभग 49,971 मीट्रिक टन धान बेचा। संभाग के अन्य जिलों बस्तर, बीजापुर, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा और सुकमा में भी बड़ी संख्या में किसानों ने केंद्रों पर पहुंचकर अपनी उपज का विक्रय किया।
संभागवार खरीदी के आंकड़े:
अतिरिक्त दो दिनों में बस्तर जिले के 79 केंद्रों से 6,486 मीट्रिक टन, बीजापुर के 30 केंद्रों से 3,069.80 मीट्रिक टन और दंतेवाड़ा के 15 केंद्रों से 5,663 मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई। कांकेर जिले के 149 केंद्रों पर सबसे अधिक 49,971.20 मीट्रिक टन धान दर्ज किया गया। वहीं कोंडागांव के 67 केंद्रों से 5,236.24 मीट्रिक टन, नारायणपुर के 17 केंद्रों से 5,815.29 मीट्रिक टन और सुकमा जिले के 25 केंद्रों से 7,013.70 मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई।
कुल मिलाकर बस्तर संभाग के 382 खरीदी केंद्रों के माध्यम से हुए इस उठाव ने उन किसानों को बड़ा सहारा दिया है जो तकनीकी या अन्य कारणों से पहले अपनी उपज नहीं बेच पाए थे। इस प्रक्रिया को सुचारू बनाने में कुल 121 मिलों का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
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