दूरदर्शन का गोल्डन दौर: ‘ब्योमकेश बक्शी’ ने बनाया जासूसी थ्रिलर का नया इतिहास

नई दिल्ली। एक समय था जब भारत में मनोरंजन का सबसे बड़ा माध्यम दूरदर्शन हुआ करता था। टीवी पर सीमित चैनलों के दौर में हर उम्र के लोग एक साथ बैठकर कार्यक्रम देखा करते थे। खासकर वीकेंड पर आने वाले शोज दर्शकों के लिए खास आकर्षण होते थे।
इसी दौर में 90 के दशक में एक ऐसा डिटेक्टिव शो आया जिसने दर्शकों के बीच जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की। प्रसिद्ध लेखक शरदेंदु बंद्योपाध्याय की कहानियों पर आधारित ‘ब्योमकेश बक्शी’ को भारतीय टेलीविजन के सबसे यादगार जासूसी शोज में गिना जाता है। यह शो 1993 से 1996 तक दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ।
इस सीरियल का निर्देशन बासु चटर्जी ने किया था, जबकि मुख्य किरदार ब्योमकेश बक्शी की भूमिका रजित कपूर ने निभाई थी। उनके साथ केके रैना ने उनके मित्र अजीत कुमार का किरदार निभाया था। बिना किसी आधुनिक तकनीक के सिर्फ अपनी बुद्धिमानी और निरीक्षण क्षमता से ब्योमकेश हर केस को सुलझा देता था।
शो के हर एपिसोड में रहस्य, रोमांच और तर्कशक्ति का शानदार मिश्रण देखने को मिलता था। इसकी सरल कहानी और मजबूत किरदारों ने इसे उस दौर का सबसे चर्चित जासूसी शो बना दिया।
आज के ओटीटी और हाई-टेक थ्रिलर्स के बीच भी ‘ब्योमकेश बक्शी’ को भारतीय टेलीविजन के क्लासिक और सबसे प्रभावशाली डिटेक्टिव शोज में गिना जाता है।


