महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल, उद्धव ठाकरे के 7 सांसदों की बगावत की चर्चा

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आने की अटकलें तेज हो गई हैं। शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसदों के पार्टी छोड़ने की चर्चाओं ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। दावा किया जा रहा है कि उद्धव ठाकरे गुट के 9 लोकसभा सांसदों में से 7 सांसद अलग गुट बनाकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक संभावित बागी सांसदों में भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय देशमुख, अरविंद सावंत, संजय जाधव, संजय पाटिल, नागेश बापूराव अष्टिकर, राजाभाऊ वाजे और संजय दिना पाटिल के नाम चर्चा में हैं। हालांकि इन दावों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि अगले एक-दो दिनों में यह राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकता है। सूत्रों का कहना है कि सांसद लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अलग गुट के गठन का दावा पेश कर सकते हैं। इस बीच शिवसेना (यूबीटी) नेतृत्व भी सक्रिय हो गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता अनिल देसाई और सांसद संजय राउत दिल्ली में मौजूद हैं और संभावित टूट को रोकने के प्रयासों में जुटे हैं।
विधायकों में भी टूट की अटकलें
सियासी चर्चा सिर्फ सांसदों तक सीमित नहीं है। शिंदे गुट के विधायक कृपाल तुमाणे ने दावा किया है कि आने वाले समय में उद्धव ठाकरे गुट के कई विधायक भी पार्टी छोड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र से पहले सांसदों का अलग गुट बन सकता है और विधायकों के स्तर पर भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
शिंदे गुट का दावा
केंद्रीय राज्यमंत्री और शिंदे गुट के नेता प्रतापराव जाधव ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) के कई सांसद और विधायक पार्टी के भीतर खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उनके अनुसार, सम्मान और संवाद की कमी के कारण कई जनप्रतिनिधि असंतुष्ट हैं और इसी वजह से पार्टी छोड़ने पर विचार कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के अंदर बढ़ती नाराजगी का असर जल्द दिखाई दे सकता है। वहीं, “ऑपरेशन टाइगर” को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इसकी जानकारी शायद संजय राउत बेहतर तरीके से दे सकते हैं।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
फिलहाल शिवसेना (यूबीटी) की ओर से इन दावों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न ही किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने की घोषणा की है। ऐसे में आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति किस दिशा में जाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
यदि सांसदों और विधायकों के स्तर पर बड़ी टूट होती है, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए हाल के वर्षों का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा।



