बस्तर के विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए कार्ययोजना तैयार, राज्य स्तरीय समिति की पहली बैठक संपन्न

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से किन्हीं कारणोंवश पड़ोसी राज्यों तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में विस्थापित हुए परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मंत्रालय महानदी भवन में अपर मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार पिंगुआ की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय अंतर्विभागीय समिति की प्रथम बैठक में इस संबंध में विस्तृत कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में जानकारी दी गई कि दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जिले के अनेक परिवार वर्तमान में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में प्रवासित हैं। राष्ट्रीय जनजातीय आयोग में दायर याचिका के परिपालन में आयोग ने एक माह के भीतर सर्वे कर सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत बस्तर संभागायुक्त ने संबंधित जिला कलेक्टरों को 15 दिनों के भीतर सर्वे प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए हैं।
अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के इन तीन जिलों से तेलंगाना के 467 गांवों में 4,345 परिवारों के कुल 19,709 व्यक्ति प्रवासित हैं। इसी प्रकार, आंध्र प्रदेश के 184 गांवों में इन जिलों के 2,594 परिवारों के 11,389 व्यक्ति निवास कर रहे हैं। कुल मिलाकर बस्तर संभाग के 667 गांवों से निकले 6,939 परिवारों के 31,098 व्यक्ति वर्तमान में दोनों पड़ोसी राज्यों के 651 गांवों में रह रहे हैं।
अपर मुख्य सचिव पिंगुआ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बस्तर संभागायुक्त और पुलिस महानिरीक्षक से चर्चा कर सीमावर्ती राज्यों के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा के कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि वे प्रवासित व्यक्तियों के मूल ग्राम और निवास स्थान की सटीक जानकारी संकलित करें। साथ ही, संबंधित विभागों को शीघ्र नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पुनर्वास योजना को अंतिम रूप दिया जा सके।




