DMF घोटाला मामले में पूर्व IAS अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, 2 साल 4 महीने बाद जेल से होंगे रिहा

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित DMF घोटाला मामले में पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के दौरान उन्हें जमानत दे दी। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूरकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की बेंच में हुई। टुटेजा फिलहाल रायपुर जेल में बंद हैं और करीब 2 साल 4 महीने बाद मंगलवार को जेल से रिहा होंगे।
इधर, DMF घोटाला मामले में ACB और EOW ने दूसरा पूरक चालान भी कोर्ट में पेश कर दिया है। यह चालान पूर्व IAS अनिल टुटेजा और सतपाल सिंह छाबड़ा के खिलाफ विशेष न्यायाधीश की अदालत में दाखिल किया गया। जांच एजेंसी ने करीब 5 हजार पन्नों का पूरक चालान कोर्ट में जमा किया है। इसमें वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजी साक्ष्य और कई अहम बयानों का उल्लेख किया गया है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, जिला खनिज न्यास निधि यानी DMF फंड के उपयोग में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप हैं। EOW और ED की जांच में सामने आया है कि कोरबा DMF फंड से कई टेंडरों में कथित रूप से नियमों को बदलकर आर्थिक लाभ पहुंचाया गया। आरोप है कि फंड खर्च के नियमों में बदलाव कर मटेरियल सप्लाई, कृषि उपकरण, ट्रेनिंग और मेडिकल उपकरणों जैसे कार्यों को शामिल किया गया, ताकि ज्यादा कमीशन वाले प्रोजेक्ट मंजूर किए जा सकें।
जांच में यह भी दावा किया गया है कि टेंडर प्रक्रिया में अधिकारियों, बिचौलियों और ठेकेदारों के बीच सांठगांठ हुई। ED की रिपोर्ट के आधार पर EOW ने धारा 120B और 420 के तहत केस दर्ज किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, ठेकेदारों से 25 से 40 प्रतिशत तक कमीशन लिया गया।
ACB की ओर से कोर्ट में पेश चालान में कई फर्जी फर्मों, बैंक खातों और कैश ट्रांजैक्शन का भी जिक्र किया गया है। तलाशी के दौरान लाखों रुपये नकद, बैंक खाते और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए थे। मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति भी लगातार गर्म बनी हुई है।



