Chhattisgarh

UGC के नए नियमों के खिलाफ बिलासपुर में विरोध, न्यायधानी में बंद बेअसर, खुली रहीं दुकानें


बिलासपुर। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों के विरोध में आज देशभर में सवर्ण समाज ने बंद का आह्वान किया है। हालांकि, छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में यह बंद बेअसर नजर आया और शहर के मुख्य बाजार सामान्य दिनों की तरह खुले रहे। लेकिन जैसे-जैसे दिन बढ़ा, विभिन्न संगठनों ने सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है।

सामान्य वर्ग के समाज प्रतिनिधियों, शिक्षकों, छात्रों और विभिन्न संगठनों ने UGC के नए नियमों पर गहरी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि ये नियम शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के हितों के खिलाफ हैं, और सामान्य वर्ग के छात्रों के हितों की अनदेखी की जा रही है।

UGC कानून विरोध आंदोलन के संयोजक डॉ. प्रदीप शुक्ला ने कहा कि जब तक इन नियमों को रद्द नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि आज शहर में बड़ी रैली निकाली जाएगी और प्रशासन को ज्ञापन सौंपने की तैयारी की जा रही है। फिलहाल, पुलिस और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।

UGC के नए नियमों का विरोध क्यों?

UGC ने यह नियम रोहित वेमुला और पायल तड़वी के कथित जातिगत भेदभाव के कारण हुई मौतों के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तैयार किए थे। इन नियमों का उद्देश्य कैंपस में जातिगत और अन्य आधारों पर होने वाले भेदभाव को खत्म करना था। हालांकि, इन नियमों के लागू होते ही सवर्ण समाज ने देशभर में इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

सामान्य वर्ग (S-4 जैसे संगठन) और कई शिक्षक समूहों ने विरोध के पीछे तीन मुख्य कारण बताए हैं:

  1. झूठे आरोपों का डर: सवर्ण संगठनों का मानना है कि ‘इक्विटी स्क्वाड’ और ‘समता दूत’ जैसी व्यवस्थाओं से निर्दोष छात्रों और शिक्षकों को आपसी रंजिश के चलते झूठे मामलों में फंसाया जा सकता है।
  2. असमान सुरक्षा: विरोध करने वालों का कहना है कि ये नियम केवल आरक्षित वर्गों की सुरक्षा की बात करते हैं, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए भेदभाव से सुरक्षा का कोई स्पष्ट ढांचा नहीं दिखता।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने इन नए नियमों पर रोक लगाते हुए कहा कि ‘भेदभाव’ की परिभाषा वर्तमान रेगुलेशन में बहुत धुंधली है। कोर्ट ने कहा कि नियमों को और अधिक समावेशी बनाने की आवश्यकता है, ताकि यह देखा जा सके कि ये ‘समानता के अधिकार’ का उल्लंघन तो नहीं कर रहे। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक इस पर अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक 2012 के पुराने UGC नियम ही प्रभावी रहेंगे।

Chaiपुर
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NU Desk

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