छत्तीसगढ़ में डीए बढ़ोतरी पर बढ़ा कर्मचारियों का दबाव, साढ़े चार लाख कर्मियों की सरकार से बड़ी मांग

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य न्यायिक सेवा के अधिकारियों के महंगाई भत्ते यानी डीए में 2 फीसदी बढ़ोतरी का फैसला लिया है। केंद्र सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों का डीए बढ़ाए जाने के बाद राज्य सरकार ने भी यह कदम उठाया है। इससे पहले छत्तीसगढ़ पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के कर्मचारियों के डीए में भी 2 प्रतिशत की वृद्धि की जा चुकी है। अब प्रदेश के करीब साढ़े चार लाख नियमित कर्मचारियों की नजर सरकार के अगले फैसले पर टिक गई है।
सरकारी कर्मचारियों में इस बात को लेकर नाराजगी बढ़ रही है कि अब तक उनके डीए बढ़ोतरी का ऐलान नहीं किया गया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच वे लंबे समय से राहत का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन हर बार देरी की जा रही है।
कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार डीए बढ़ाने में हमेशा देरी करती है। साथ ही इसे देय तिथि से लागू नहीं किया जाता। इसका सीधा असर कर्मचारियों की जेब पर पड़ता है। कर्मचारियों को हर बार एरियर्स का नुकसान उठाना पड़ता है। उनका कहना है कि क्या महंगाई सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों, न्यायिक अधिकारियों और बिजली कंपनी के कर्मियों के लिए ही बढ़ रही है।
जानकारी के मुताबिक जनवरी 2026 में राज्य सरकार ने कर्मचारियों के डीए में 3 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद सातवें वेतनमान के तहत डीए 58 प्रतिशत हो गया था। वहीं छठवें वेतनमान में यह 257 प्रतिशत पहुंच गया। लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि समय पर आदेश जारी नहीं होने से हर महीने 200 रुपए से लेकर 3 हजार रुपए तक का आर्थिक नुकसान हो रहा है।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है। फेडरेशन ने लंबित एरियर्स को जीपीएफ खाते में जमा करने की मांग भी उठाई है। कर्मचारी नेता कमल वर्मा ने कहा कि राजस्थान, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में डीए बढ़ोतरी की घोषणा हो चुकी है। ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार को भी जल्द फैसला लेना चाहिए।
वहीं शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी ने कहा कि सरकार को कर्मचारियों को समय पर डीए देना चाहिए ताकि महंगाई से राहत मिल सके। फिलहाल कर्मचारियों को अब सरकार की अगली घोषणा का इंतजार है।



