रायपुर में बाल श्रम का बड़ा खुलासा: घर लौटने की गुहार लगाते मिले नाबालिग, प्रशासन ने कराया रेस्क्यू…

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कमिश्नरेट पुलिस व्यवस्था लागू होने के बावजूद एक ऐसा गंभीर अपराध सामने आया है, जिस पर अक्सर चर्चा तो होती है लेकिन कार्रवाई कम दिखाई देती है। यह मामला है बाल श्रम और नाबालिगों के शोषण का। Nation Update News की पड़ताल में एक ऐसा नेटवर्क सामने आया, जहां कम उम्र के बच्चों को कथित ट्रेनिंग और नौकरी का झांसा देकर रायपुर लाया गया और उनसे उनकी इच्छा के विरुद्ध काम कराया जा रहा था।
एक फोन कॉल से शुरू हुई पड़ताल...
Nation Update News के संवाददाता को एक फोन कॉल प्राप्त हुई। कॉल करने वाले ने बताया कि डीडी नगर थाना क्षेत्र में कुछ नाबालिग बच्चे फंसे हुए हैं और अपने घर लौटना चाहते हैं। जानकारी के अनुसार, बच्चों को नौकरी और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर रायपुर बुलाया गया था।

बच्चों ने बताया कि उनसे ₹47,000 जमा करवाए गए, जिसके बाद उन्हें रायपुर लाया गया। यहां उन्हें उस काम में नहीं लगाया गया जिसके लिए वे आए थे, बल्कि ऑनलाइन सेलिंग और मार्केटिंग जैसे कार्य कराए जा रहे थे। सबसे चिंताजनक बात यह थी कि अधिकांश बच्चों की उम्र मात्र 16 से 17 वर्ष थी।
माता-पिता से बात करने तक की नहीं थी अनुमति...
बच्चों ने आरोप लगाया कि उन्हें अपने माता-पिता से खुलकर बात करने की अनुमति नहीं दी जाती थी। बाहर घूमने-फिरने पर भी रोक थी। उन्हें जिस स्थान पर रखा गया था, वहां न तो पर्याप्त हवा की व्यवस्था थी और न ही मूलभूत सुविधाएं।

बच्चों का कहना था कि जब वे घर लौटने की इच्छा जताते थे तो उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। वे अपने परिवार के पास लौटना चाहते थे, लेकिन उन्हें जाने नहीं दिया जा रहा था।
ऑफिस पहुंची टीम तो खुली हकीकत...
Nation Update News की टीम जब चंगोराभाठा स्थित कथित कार्यालय पहुंची तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था। ऑफिस के नाम पर मात्र कुछ कुर्सियां, एक टूटा पंखा और एक जर्जर टेबल दिखाई दी। जगह-जगह बिखरे दस्तावेजों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं था।

शुरुआत में वहां मौजूद मैनेजर ने दावा किया कि सभी बच्चे अपनी मर्जी से काम कर रहे हैं। लेकिन जब सवाल-जवाब गहराए तो वह घबरा गया और स्वीकार किया कि कम उम्र के बच्चे भी वहां कार्य कर रहे हैं। उसने कैमरा बंद करने और मामले को आगे न बढ़ाने की अपील भी की।
4 किलोमीटर दूर किराए के मकान में रह रहे थे बच्चे...
जांच के दौरान पता चला कि बच्चों को कार्यालय से लगभग 4 किलोमीटर दूर किराए के मकान में रखा गया था। रोजाना उन्हें पैदल चलकर कार्यालय पहुंचना पड़ता था। मकान में पहुंचने पर टीम को कुछ संदिग्ध सामग्री और बक्से मिले। बच्चों ने बताया कि उन्हें लगभग ₹40,000 का एक बॉक्स दिया गया था, जिसे बेचने का दबाव बनाया जाता था। बॉक्स में कपड़े और अन्य सामान रखे गए थे।

बच्चों ने यह भी बताया कि उन्हें दिनभर काम कराया जाता था और भोजन के नाम पर कई बार केवल एक समय खाना मिलता था, वह भी देर रात। आर्थिक मजबूरी और परिवार द्वारा कर्ज लेकर जमा कराए गए पैसों के कारण वे विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे।
प्रशासन की कार्रवाई, बच्चों का रेस्क्यू...
मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला एवं बाल संरक्षण आयोग तथा डीडी नगर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान कई दस्तावेज संदिग्ध और कथित रूप से फर्जी पाए गए, जिन्हें जब्त कर कार्यालय को सील करने की कार्रवाई की गई। संबंधित मैनेजर को पूछताछ के लिए थाना ले जाया गया।

रेस्क्यू किए गए बच्चों को महिला एवं बाल संरक्षण आयोग द्वारा भोजन उपलब्ध कराया गया और उन्हें आश्वस्त किया गया कि जल्द से जल्द उनके घर वापसी की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही यह भी बताया गया कि कंपनी द्वारा ली गई रकम वापस दिलाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर प्रयास किए जाएंगे।
घर लौटने की खुशी...
रेस्क्यू किए गए बच्चों ने खुशी जताते हुए कहा कि अब वे अपने परिवार के पास लौट सकेंगे। उन्होंने पुलिस प्रशासन, महिला एवं बाल संरक्षण आयोग और Nation Update News की टीम का आभार व्यक्त किया।



