Justice Rajani Dubey retires after disposing of 18,775 cases;
Chhattisgarh

18,775 मामलों के निपटारे के साथ जस्टिस रजनी दुबे सेवानिवृत्त, हाईकोर्ट में दी गई भावभीनी विदाई

बिलासपुर। हाईकोर्ट में आज जस्टिस रजनी दुबे की सेवानिवृत्ति के अवसर पर उनका ओवेशन और विदाई समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के कोर्ट रूम में किया गया। उन्होंने अपने कार्यकाल में एकल पीठ में 537 और डिवीजन बेंच में 151 प्रकाशित निर्णय सहित कुल 18,775 से अधिक मामलों का सफलतापूर्वक निराकरण किया.

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि जस्टिस रजनी दुबे ने अपने कार्यकाल के दौरान प्रत्येक मामले को अत्यंत धैर्य और निष्पक्षता के साथ सुना। साथ ही बार और बेंच के साथ सौहार्दपूर्ण और सम्मानजनक संबंध बनाए रखा। उनके शांत स्वभाव, आचरण और न्याय-निर्णयन के संतुलित दृष्टिकोण ने उन्हें सभी का प्रिय बना दिया। उनकी विनम्रता और शालीनता ने न्यायपालिका की गरिमा को सदैव बढ़ाया। वे अपनी स्पष्टता, संतुलित दृष्टिकोण तथा विधि के शासन के प्रति सम्मान के लिए प्रसिद्ध रहीं।

अपने संपूर्ण न्यायिक जीवन में न्यायमूर्ति रजनी दुबे ने बुद्धिमत्ता, निष्पक्षता और संवेदनशीलता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। उनका दृष्टिकोण न केवल कानून की गहरी समझ को दर्शाता था, बल्कि न्याय के मानवीय पहलुओं के प्रति उनकी सूक्ष्म जागरूकता को भी प्रकट करता था। उनका आचरण युवा न्यायिक अधिकारियों के लिए प्रेरणास्रोत है। सीजे ने उनके द्वारा सुने गए मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संख्या उनके विशाल योगदान को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

एमपी-छत्तीसगढ़ के विभिन्न न्यायालयों में रहीं पदस्थ

जस्टिस रजनी दुबे ने अपने संबोधन में ईश्वर, चीफ जस्टिस, हाईकोर्ट के सभी जजों, परिवार, न्यायिक अधिकारीगण, सहयोगियों, अधिवक्ताओं एवं न्यायालय परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अपने कार्यकाल के अनुभव साझा किए।

उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति रजनी दुबे का जन्म 30 जून, 1964 को जबलपुर (मध्यप्रदेश) में हुआ। उन्होंने मंडला से स्नातक और रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर से एलएल.बी. की डिग्री प्राप्त की तथा वर्ष 1987 में मध्यप्रदेश राज्य बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत होकर मई 1990 तक जिला अदालत और मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में वकालत की।

वर्ष 1990 में सिविल जज के रूप में चयनित होने के बाद मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के अधीनस्थ न्यायालयों में विभिन्न पदों पर सेवाएं दीं। वे सागर, जबलपुर और बिलासपुर में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, किशोर न्याय बोर्ड की प्रधान मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रहीं। वे रायपुर में विशेष न्यायाधीश (सीबीआई), राजनांदगांव में परिवार न्यायालय की न्यायाधीश, बलौदाबाजार में जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर में रजिस्ट्रार (सतर्कता) के पदों पर कार्यरत रहीं। 18 जून 2018 को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत हुईं और 11 मई 2020 को स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।

Chaiपुर
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