छत्तीसगढ़ के विशेष बच्चों के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जल्द होगी ‘विशेष शिक्षकों’ की भर्ती; जानें पूरा आदेश

नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (दिव्यांग बच्चों) की पढ़ाई-लिखाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम और बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार को साफ निर्देश दिया है कि राज्य में विशेष शिक्षकों (Special Teachers) की भर्ती प्रक्रिया को बिना किसी देरी के जल्द से जल्द पूरा किया जाए।
यह आदेश ‘राजनीश कुमार पांडेय बनाम भारत संघ’ मामले में आया है। कोर्ट में आरसीआई प्रशिक्षित शिक्षक संघ (छत्तीसगढ़) की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड कौस्तुभ शुक्ला और अधिवक्ता पलाश तिवारी ने दमदार पैरवी की। उन्होंने अदालत को बताया कि राज्य में विशेष बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को तुरंत सुधारने की जरूरत है।
सरकार ने माना- पद खाली हैं, भर्ती अभी अधूरी है
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा पेश किया। सरकार ने कोर्ट को बताया कि छत्तीसगढ़ में विशेष शिक्षकों के कुल 848 पद मंजूर किए गए हैं। इनमें से 100 पदों के लिए अक्टूबर 2025 में विज्ञापन निकाला गया था।
इस भर्ती में से भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI) के नियमों के तहत योग्यता रखने वाले 62 शिक्षकों को नौकरी मिल चुकी है। लेकिन, शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से जुड़े कुछ नियमों और विषयों के फेर में 38 पद अब भी खाली पड़े हुए हैं।
संविदा और मानदेय वाले शिक्षकों को मिलेगी बड़ी राहत
कोर्ट में सुनवाई के दौरान संघ ने एक और जरूरी बात सामने रखी। उन्होंने बताया कि अभी राज्य के प्राथमिक स्तर पर 155 ब्लॉक रिसोर्स पर्सन संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर काम कर रहे हैं। वहीं, माध्यमिक स्तर पर 85 विशेष शिक्षक फिक्स मानदेय पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर संवेदनशीलता दिखाते हुए बड़ा निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि इन सभी 155 ब्लॉक रिसोर्स पर्सन और 85 विशेष शिक्षकों को एक मौका दिया जाए। ये सभी शिक्षक अपने पढ़ाई और प्रोफेशनल काम के सारे दस्तावेज स्क्रीनिंग कमेटी के सामने पेश करेंगे। अगर वे RCI के तय नियमों और योग्यताओं पर खरे उतरते हैं, तो नियम के मुताबिक उनकी नियुक्ति पर विचार किया जाए।
छत्तीसगढ़ में 49 हजार से ज्यादा विशेष बच्चे, शिक्षकों की भारी कमी
अदालत ने साफ किया कि जब इन 155 और 85 शिक्षकों के मामलों का निपटारा हो जाएगा और योग्य उम्मीदवारों को नियुक्ति मिल जाएगी, उसके बाद छत्तीसगढ़ सरकार बाकी बचे खाली पदों को भरने के लिए नई भर्ती निकालने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में राज्य के कड़वे सच को भी दर्ज किया। कोर्ट ने नोट किया कि छत्तीसगढ़ में 49,000 से ज्यादा विशेष आवश्यकता वाले बच्चे हैं। इन बच्चों को पढ़ाने के लिए राज्य को करीब 3,981 विशेष शिक्षकों की जरूरत है। अदालत ने जोर देकर कहा कि समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) को मजबूत करना बेहद जरूरी है। कोर्ट का यह फैसला छत्तीसगढ़ के दिव्यांग बच्चों के शिक्षा के अधिकार को मजबूत करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।



