नवा रायपुर: करोड़ों का जनजातीय संग्रहालय और घटिया इंतजाम! AC में ब्लास्ट के बाद भड़की आग, बाल-बाल बचीं बेशकीमती धरोहरें

रायपुर: राजधानी के नवा रायपुर में करोड़ों की लागत से बने भव्य जनजातीय संग्रहालय (ट्राइबल म्यूजियम) में कल एक बड़ा हादसा होते-होते बचा। पूरी तरह वातानुकूलित (AC) इस म्यूजियम की छत पर लगी एसी की आउटर मशीन में अचानक जोरदार धमाके के साथ आग लग गई। इस घटना ने संग्रहालय के निर्माण में इस्तेमाल हुए उपकरणों की क्वालिटी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
धमाके के साथ उठा काला धुआं
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दोपहर के वक्त अचानक एक धमाका हुआ और छत से आग की लपटें उठने लगीं। धुआं इतना तेज था कि दूर से ही दिखाई दे रहा था। गनीमत यह रही कि आग केवल एक ही आउटर मशीन तक सीमित रही। चूंकि छत पर कई मशीनें एक-दूसरे से जुड़ी (इंटर-कनेक्ट) हैं, अगर आग फैलती तो पूरे म्यूजियम को अपनी चपेट में ले सकती थी। सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि लपटें एसी पाइपलाइन या बिजली के तारों के जरिए नीचे गैलरी तक नहीं पहुंचीं, जहां आदिवासियों की बेशकीमती धरोहरें रखी हुई हैं।
आग बुझाने में लगे डेढ़ घंटे
संग्रहालय के कर्मचारियों ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद नवा रायपुर फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंची, लेकिन आग पर पूरी तरह काबू पाने में करीब डेढ़ घंटे का समय लग गया। इतनी हाई-टेक बिल्डिंग में आग बुझाने के स्थानीय इंतजामों और रिस्पॉन्स टाइम को लेकर भी अब सवाल उठ रहे हैं।
6 महीने पहले ही हुआ था उद्घाटन
हैरानी की बात यह है कि इस संग्रहालय का उद्घाटन हुए अभी जुम्मा-जुम्मा छह महीने ही हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्योत्सव के खास मौके पर इसका लोकार्पण किया था। इतने कम समय में ही मशीनों में ब्लास्ट होना और आग लगना निर्माण कार्य की गुणवत्ता (क्वालिटी) की पोल खोल रहा है।
जांच के घेरे में निर्माण एजेंसी
अब लोग यह पूछ रहे हैं कि क्या करोड़ों के इस प्रोजेक्ट में घटिया दर्जे के उपकरणों का इस्तेमाल किया गया? अगर यह आग रात के वक्त लगती या नीचे तक फैल जाती, तो राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को होने वाले नुकसान की भरपाई नामुमकिन होती। फिलहाल, प्रशासन ने मामले की जांच की बात कही है।



