बंगाल विधानसभा चुनाव: वोटर लिस्ट से नाम कटने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ममता बनर्जी को नई याचिका की अनुमति

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल चुनाव से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मामले में बड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य याचिकाकर्ता उन दावों को लेकर नई याचिकाएं दाखिल कर सकते हैं, जिनमें मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के कारण चुनाव परिणाम प्रभावित होने की बात कही गई है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ बंगाल में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील और सांसद कल्याण बनर्जी ने आंकड़ों के साथ अपनी दलीलें पेश कीं।
जीत के अंतर से ज्यादा कटे वोट
कल्याण बनर्जी ने अदालत को बताया कि बंगाल की 31 विधानसभा सीटों पर हार-जीत का अंतर उन वोटरों की संख्या से भी कम था, जिनके नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए थे। उन्होंने एक सीट का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां टीएमसी उम्मीदवार महज 862 वोटों से हार गया, जबकि उसी क्षेत्र में एसआईआर प्रक्रिया के बहाने 5000 से ज्यादा नाम हटाए गए थे।
35 लाख अपीलों का मामला
टीएमसी की ओर से यह भी कहा गया कि राज्य में उनकी पार्टी और बीजेपी के बीच कुल वोटों का अंतर लगभग 32 लाख था। वहीं, वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के खिलाफ जो अपीलें दायर की गई हैं, उनकी संख्या 35 लाख से भी ज्यादा है। कल्याण बनर्जी ने चिंता जताई कि इन लाखों अपीलों के निपटारे में सालों लग सकते हैं, जिससे लोकतंत्र की मूल भावना और चुनावी नतीजों की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को सुनने के बाद याचिकाकर्ताओं को पूरी तैयारी के साथ नई याचिका दाखिल करने की छूट दी है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि ममता बनर्जी इस मामले में आगे क्या कदम उठाती हैं और इन नई याचिकाओं का बंगाल की भविष्य की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।



