छत्तीसगढ़: गर्मियों में नहीं होगी पानी की किल्लत, डिप्टी सीएम अरुण साव ने दिए सख्त निर्देश

रायपुर।
भीषण गर्मी और संभावित पेयजल संकट को देखते हुए छत्तीसगढ़ के नगरीय प्रशासन विभाग ने राज्य के सभी निकायों के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उप मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव की समीक्षा बैठक के बाद विभाग ने सभी नगर निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर जल प्रदाय प्रणालियों की मरम्मत सुनिश्चित करने को कहा है।
निर्देश के अनुसार, सभी निकायों को अपने क्षेत्र के हैंडपंपों और बोरवेल की चेकिंग कर सात दिनों में सुधार कार्य पूरा करना होगा। पाइपलाइन लीकेज और टूट-फूट को तत्काल ठीक करने के साथ ही, नालियों से गुजरने वाली पाइपलाइनों और हाउस कनेक्शनों को स्थानांतरित करने के आदेश दिए गए हैं ताकि दूषित पानी की समस्या न हो। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन वार्डों में जलस्तर नीचे चला गया है, वहां वैकल्पिक माध्यमों से जलापूर्ति की जाए।
पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ब्लीचिंग पाउडर और सोडियम हाइपोक्लोराइड के उपयोग के साथ ही ओवरहेड टैंकों की नियमित सफाई और क्लोरीनेशन के निर्देश दिए गए हैं। सार्वजनिक स्थलों जैसे बस स्टैंड और बाजारों में प्याऊ घर खोलने और वहां कर्मचारियों की तैनाती करने को कहा गया है। इसके अलावा, अमृत मिशन और 15वें वित्त आयोग के तहत अधूरी जल योजनाओं को 15 दिनों के भीतर पूर्ण कर चालू करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
पशुधन की सुरक्षा के लिए तालाबों में जल भराव हेतु जल संसाधन विभाग से समन्वय और भू-जल स्तर सुधारने के लिए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। निकायों में नगर निगम आयुक्त और सीएमओ को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जो प्रतिदिन शिकायतों के निवारण की समीक्षा करेंगे। जल संरक्षण के लिए डोर-टू-डोर वाहनों के जरिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।



