55 की उम्र में फिर से माता-पिता बनने का हक: हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत, इकलौती संतान खोने के बाद दंपती को नई उम्मीद, कोर्ट ने दिया फैसला

बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक अहम मामले में दंपती को 55 वर्ष की उम्र में आईवीएफ तकनीक से दोबारा माता-पिता बनने की अनुमति दी है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने साफ कहा कि संतान सुख भी जीवन के अधिकार का हिस्सा है। याचिकाकर्ता दंपती ने बताया कि वर्ष 2022 में उनकी इकलौती बेटी का निधन हो गया था, जिसके बाद उन्होंने फिर से परिवार शुरू करने का निर्णय लिया। जांच में महिला को चिकित्सकीय रूप से पूरी तरह सक्षम पाया गया, लेकिन पति की उम्र 55 वर्ष पार होने के कारण इलाज शुरू करने से मना कर दिया गया था।
उम्र सीमा पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी, प्रजनन अधिकार को दी प्राथमिकता
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रजनन का अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है और इसे केवल तकनीकी आधार पर नहीं रोका जा सकता। एआरटी कानून 2021 में महिला और पुरुष के लिए उम्र की सीमा अलग-अलग तय है, इसे संयुक्त रूप से लागू नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि जब पत्नी की उम्र निर्धारित सीमा के भीतर है और वह चिकित्सकीय रूप से सक्षम है, तो केवल पति की उम्र के आधार पर मातृत्व का अधिकार नहीं छीना जा सकता। इस फैसले को प्रजनन अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


