छत्तीसगढ़ में एग्रीस्टेक परियोजना से कृषि क्षेत्र में डिजिटल क्रांति: 85 प्रतिशत खसरों का सर्वे पूरा
रायपुर: छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र को आधुनिक और तकनीक से लैस करने के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी एग्रीस्टेक परियोजना मील का पत्थर साबित हो रही है। इस परियोजना के तहत ‘डिजिटल क्रॉप सर्वे’ के माध्यम से खेती-किसानी को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, जिससे कृषि प्रबंधन में पारदर्शिता और सटीकता आई है। मोबाइल ऐप आधारित इस व्यवस्था से अब खरीफ और रबी फसलों का डेटा सीधे ऑनलाइन दर्ज किया जा रहा है।
85 प्रतिशत डिजिटल सत्यापन का लक्ष्य हासिल
खरीफ वर्ष 2025 के दौरान राज्य के 33 जिलों के 18,008 गांवों में व्यापक सर्वेक्षण किया गया। कुल 1 करोड़ 19 लाख से अधिक खसरों में से 1 करोड़ 18 लाख खसरों को अनुमोदित किया जा चुका है। इस प्रकार राज्य ने 85 प्रतिशत डिजिटल सर्वे कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। वर्तमान में रबी फसल वर्ष 2026 का सर्वेक्षण कार्य 1 जनवरी से निरंतर जारी है।
31 लाख से अधिक किसानों की बनी फार्मर आईडी
परियोजना के अंतर्गत प्रदेश के लगभग 40 लाख किसानों में से 31 लाख 68 हजार किसानों का सत्यापन कर उनकी विशिष्ट ‘फार्मर आईडी’ तैयार कर ली गई है। यह कुल लक्ष्य का 79.22 प्रतिशत है। छत्तीसगढ़ के इस बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए केंद्र सरकार ने विशेष सहायता के रूप में राज्य को 104 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है।
पारदर्शी कृषि तंत्र पर मुख्यमंत्री का जोर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार किसानों को तकनीक से जोड़कर खेती को अधिक सक्षम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि एग्रीस्टेक परियोजना से न केवल कृषि आंकड़ों का वैज्ञानिक प्रबंधन होगा, बल्कि किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी अधिक तेजी से और पारदर्शी तरीके से मिल सकेगा।
ग्रामीण युवाओं को मिला रोजगार
राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने जानकारी दी कि डिजिटल क्रॉप सर्वे ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा जरिया बन गया है। खरीफ सीजन 2025-26 के दौरान 33 जिलों में 58 हजार 335 ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को सर्वेयर के रूप में काम मिला है। इस कार्य के लिए युवाओं को लगभग 12 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा रहा है।
वर्ष में दो बार रोजगार के अवसर
अब साल में दो बार (खरीफ और रबी सीजन) सर्वे होने से गांवों में युवाओं को नियमित रोजगार मिलेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और तकनीक आधारित नई कृषि प्रणाली को बल मिलेगा। इस पहल से न केवल फसल उत्पादन का सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा, बल्कि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में क्षति का आकलन और राहत वितरण भी आसान हो जाएगा।



