रायपुर कांग्रेस में ‘लिस्ट’ पर रार: शहर अध्यक्ष ने जारी की वार्ड अध्यक्षों की सूची, पीसीसी ने चंद घंटों में ही किया निरस्त

रायपुर: छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठन की नियुक्तियों को लेकर खींचतान तेज हो गई है। रायपुर शहर कांग्रेस द्वारा शुक्रवार को जारी की गई 66 वार्ड अध्यक्षों की सूची को प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने महज कुछ घंटों के भीतर ही निरस्त कर दिया। पीसीसी ने इस सूची को ‘अवैधानिक’ करार देते हुए साफ किया कि इसके लिए जरूरी अनुमति नहीं ली गई थी।
नाराजगी के बाद जल्दबाजी में जारी हुई सूची
इस पूरे विवाद की जड़ पीसीसी चीफ दीपक बैज द्वारा दी गई समय सीमा है। बैज ने सभी जिला अध्यक्षों को 15 अप्रैल तक बूथ से लेकर जिला स्तर तक की नई कार्यकारिणी गठित करने का अल्टीमेटम दिया है। दो दिन पहले हुई समीक्षा बैठक में रायपुर शहर की कार्यकारिणी न बनने पर नाराजगी भी जताई गई थी। माना जा रहा है कि इसी दबाव में शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन ने शुक्रवार को आनन-फानन में वार्ड अध्यक्षों के नामों का ऐलान कर दिया।
क्यों रद्द हुई लिस्ट?
पीसीसी का कहना है कि वार्ड अध्यक्षों और कार्यकारी अध्यक्षों की घोषणा करने से पहले प्रदेश नेतृत्व से अनुमोदन (अनुमति) लेना अनिवार्य है। शहर कांग्रेस ने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया, जिसे नियमों की अनदेखी मानते हुए सूची को तुरंत खारिज कर दिया गया। अब पार्टी के भीतर इस कार्रवाई को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
“टकराव जैसा कुछ नहीं”
मामले के तूल पकड़ने पर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि संगठन के भीतर कोई विवाद या टकराव नहीं है। सूची को लेकर जो भी तकनीकी दिक्कतें आई हैं, उस पर वे जल्द ही पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज और वरिष्ठ नेताओं से मिलकर चर्चा करेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि आपसी बातचीत से सभी मुद्दों को सुलझा लिया जाएगा।
क्या होगा असर?
15 अप्रैल की डेडलाइन नजदीक है और रायपुर जैसे महत्वपूर्ण जिले में सूची रद्द होने से कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति है। इस घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि पीसीसी अब नियुक्तियों में पूरी पारदर्शिता और नियमों का पालन चाहती है। यदि अगले दो-तीन दिनों में मान्य सूची नहीं आती, तो इसका असर आने वाले संगठनात्मक कार्यक्रमों पर पड़ सकता है।



