कर्म ही सच्ची पूजा: रायपुर के राम मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा सुनने पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शुक्रवार को राजधानी के वीआईपी रोड स्थित श्रीराम मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल हुए। उन्होंने व्यास पीठ पर विराजमान कथावाचक श्री हिमांशु कृष्ण भारद्वाज से भगवान कृष्ण की बाललीलाओं का प्रसंग सुना। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने भगवान के दर्शन किए और प्रदेश की खुशहाली के लिए प्रार्थना की।
मानव सेवा ही जीवन की सार्थकता
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रीमद्भागवत हमें संदेश देती है कि कर्म ही ईश्वर की सच्ची पूजा है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन दुर्लभ है और दूसरों की सेवा करके ही इसे सार्थक बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के आध्यात्मिक महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि यह प्रदेश प्रभु राम का ननिहाल और माता शबरी की पावन भूमि है।
नक्सलवाद और धर्मांतरण पर कड़ा रुख
मुख्यमंत्री ने कहा कि ईश्वर के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ अब नक्सलवाद से मुक्त हो रहा है और विकास की राह पर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने अवैध धर्मांतरण को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और बताया कि प्रदेश में ‘धर्म स्वातंत्र्य कानून’ लागू किया गया है। इसके जरिए अवैध रूप से धर्म बदलवाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के प्रावधान किए गए हैं।
तीर्थ दर्शन और गौसेवा के लिए नई योजनाएं
सरकार की उपलब्धियां बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा:
- रामलला दर्शन: अब तक 42 हजार लोग अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन कर चुके हैं।
- सुरभि गौधाम: गायों के संरक्षण और उनके चारे-पानी की व्यवस्था के लिए नई योजना शुरू की गई है।
- तीर्थ यात्रा: 5 हजार से ज्यादा बुजुर्गों को देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों की यात्रा कराई गई है।
बड़ी संख्या में उमड़े श्रद्धालु
6 अप्रैल से शुरू हुई यह कथा 12 अप्रैल तक चलेगी। समापन के अवसर पर मुख्यमंत्री ने बांके बिहारी लाल की आरती की। इस कार्यक्रम में कृषि मंत्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल समेत कई वरिष्ठ नेता और हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री के इस दौरे और रामलला दर्शन योजना की चर्चा से प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बल मिल रहा है। साथ ही, गौसेवा और धर्मांतरण कानून जैसे मुद्दों पर सरकार के सख्त रुख से स्थानीय समुदायों में सुरक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण का भरोसा बढ़ा है।



