जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को बड़ा झटका: हाईकोर्ट ने दिया 3 हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश, 23 साल बाद बढ़ीं मुश्किलें!

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी को बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट में हुई महत्वपूर्ण सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला 4 जून 2003 का है, जब एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना से पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई थी। मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से दो आरोपी सरकारी गवाह बन गए थे।
वर्ष 2007 में रायपुर की विशेष अदालत ने 28 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वहीं अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। इसके खिलाफ जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी ने उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की थी, जिस पर बाद में मामले को हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए भेजा गया।
राम अवतार जग्गी व्यवसायिक पृष्ठभूमि से जुड़े हुए थे और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे। जब शुक्ल ने कांग्रेस छोड़कर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का दामन थामा, तब जग्गी भी उनके साथ जुड़ गए थे और उन्हें छत्तीसगढ़ में पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया था। हाईकोर्ट के ताजा निर्देश के बाद मामले में नई कानूनी स्थिति बन गई है और आगे की प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।



