West Bengal Cabinet Expansion: बंगाल में कैबिनेट विस्तार आज, 35 नए मंत्री लेंगे शपथ, मंत्रिपरिषद की संख्या पहुंचेगी 41

नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज बड़ा दिन माना जा रहा है। राज्य में भाजपा सरकार के गठन के तीन सप्ताह बाद मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी अपने मंत्रिमंडल का पहला बड़ा विस्तार करने जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, कोलकाता स्थित नबन्ना में सुबह 11 बजे तक 35 भाजपा विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। राज्यपाल आर.एन. रवि नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।
इस कैबिनेट विस्तार के साथ पश्चिम बंगाल सरकार का मंत्रिमंडल काफी बड़ा हो जाएगा। फिलहाल मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी और उनके पांच कैबिनेट सहयोगी सरकार का हिस्सा हैं। नए मंत्रियों के शामिल होने के बाद मंत्रिपरिषद की कुल संख्या बढ़कर 41 तक पहुंच जाएगी।
सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर रहेगा फोकस
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस विस्तार में सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को विशेष महत्व दिया जाएगा। मौजूदा मंत्रिमंडल में महिला, मतुआ, राजबंशी और आदिवासी समुदायों का प्रतिनिधित्व पहले से मौजूद है। इनमें अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, निसिथ प्रमाणिक और क्षुदीराम टुडू जैसे नेता शामिल हैं।
भाजपा नेतृत्व का प्रयास है कि अब अन्य समुदायों और क्षेत्रों को भी सरकार में पर्याप्त भागीदारी मिले। इससे पार्टी अपने जनाधार को और मजबूत करना चाहती है।
294 सदस्यीय विधानसभा में 44 मंत्री तक संभव
संविधान के 91वें संशोधन के अनुसार किसी भी राज्य में मंत्रियों की संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 294 सदस्य हैं। ऐसे में राज्य में अधिकतम 44 मंत्री बनाए जा सकते हैं।
35 नए मंत्रियों के शपथ लेने के बाद भी सरकार के पास तीन मंत्री पद खाली रहेंगे। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आने वाले समय में इन पदों का इस्तेमाल संगठनात्मक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने के लिए किया जा सकता है।
भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद बड़ा कदम
भाजपा ने हालिया विधानसभा चुनाव में 208 सीटें जीतकर पश्चिम बंगाल की सत्ता पर कब्जा किया था। इस जीत के साथ राज्य में तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्षों के शासन का अंत हुआ। अब कैबिनेट विस्तार को भाजपा सरकार के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और चुनावी वादों को तेजी से लागू करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए भाजपा सरकार प्रशासनिक जिम्मेदारियों का बेहतर बंटवारा करने के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने का संदेश भी देना चाहती है।


