TET की अनिवार्यता के खिलाफ सड़कों पर उतरे शिक्षक, जिला मुख्यालयों में निकाली ‘टेट मुक्ति रैली’

रायपुर। प्रदेश भर के शिक्षक अपने-अपने जिला मुख्यालयों में आज शिक्षक संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर बड़ी संख्या में एकत्रित हुए और टेट मुक्ति रैली निकालकर मुख्यमंत्री, शिक्षामंत्री, शिक्षासचिव, DPI के नाम समस्त कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। शिक्षक संघर्ष मोर्चा के पांच सूत्रीय मांगों में टेट की अनिवार्यता समाप्त करने, पुरानी सेवा गणना कर पेंशन हित लाभ देने, केंद्रीय वेतनमान प्रदाय कर वेतन विसंगति दूर करने, डीएड प्रशिक्षित शिक्षकों को ब्रिज कोर्स के माध्यम से बीएड कराने और भर्ती पदोन्नति नियम 2026 को निरस्त करने की है।
निकाली गई टेट मुक्ति रैली
शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रांतीय संचालक वीरेंद्र दुबे और केदार जैन ने रायपुर जिला रैली में और संजय शर्मा ने बिलासपुर के जिला रैली में शामिल होकर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। बाकि अन्य समस्त जिलों में मोर्चा के तीनों संगठन ( शालेय शिक्षक संघ, टीचर्स एसोशिएशन और संयुक्त शिक्षक संघ) के जिला संचालकों की अगुवाई में टेट मुक्ति रैली निकाली गई।
TET की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों में आक्रोश
झमाझम बारिश के बीच भी शिक्षकों की भारी संख्या देखने को मिली। प्रांतीय संचालक वीरेंद्र दुबे ने बताया कि TET की अनिवार्यता को लेकर भारी आक्रोश शिक्षकों में है। हम सभी शिक्षक केंद्र सरकार से इस अध्यादेश को संशोधित कर टेट की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग करते हैं।
वही राज्य के शिक्षकों को केंद्रीय वेतनमान प्रदान कर सभी शिक्षक संवर्गो के वेतन में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने की भी मांग की। संविलियन से पूर्व की सेवाओं को जोड़कर समस्त हित लाभ प्रदान किया जावे। ब्रिज कोर्स के माध्यम से डीएड प्रशिक्षित शिक्षको को बीएड कराया जाए।
प्रांतीय महासचिव धर्मेश शर्मा और कार्यकारी प्रांताध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि शिक्षक अपनी योग्यता साबित कर ही शिक्षा विभाग में अपनी सेवा दे रहा है। 2010 में आये इस नियम को 2010-11 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर थोपा जाना गलत है। प्रदेश के समस्त शिक्षक अपनी सेवा सुरक्षा को लेकर भयाक्रांत हैं,28 साल, 20 साल शिक्षकीय दायित्व निभा चुके शिक्षक पर टेट पास होने की बाध्यता की जा रही है, छग शासन को इसका स्थायी समाधान ढूंढना चाहिए । माननीय सुप्रीम कोर्ट का निर्णय जब आया उसके बाद ही नई भर्ती के शिक्षकों पर यह अनिवार्य किया जाना चाहिए, पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर बाध्यता नही होनी चाहिए।
प्रदेश मीडिया प्रभारी जितेंद्र शर्मा ने बताया कि आज का टेट मुक्ति ज्ञापन रैली प्रदेश व्यापी था। जिस शिक्षक के मन में परीक्षा, नौकरी की चिंता और भविष्य को लेकर तनाव चल रहा हो, उससे पूरी एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा के साथ बच्चों को पढ़ाने की अपेक्षा करना कितना उचित है?
शिक्षक का मानसिक तनाव केवल शिक्षक तक सीमित नहीं रहता, उसका असर कक्षा के वातावरण, शिक्षक-विद्यार्थी संवाद और सीखने की प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है। शोध भी शिक्षक तनाव और शिक्षण की गुणवत्ता के बीच संबंध की ओर संकेत करते हैं।सरकार को इस पहलू पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ानी है तो पहले शिक्षक को तनावमुक्त वातावरण दीजिए। तनावग्रस्त शिक्षक से बेहतर शिक्षा की अपेक्षा नहीं, बल्कि शिक्षक की चिंता दूर करके बेहतर शिक्षा सुनिश्चित कीजिए। प्रदेश के शिक्षक टेट मुक्ति सहित अपनी पांच मांगो को लेकर आज आंदोलित दिखा। अपनी सेवा सुरक्षा को लेकर चिंतित शिक्षकों ने आज जमकर नारे लगाए और शासन से टेट अनिवार्यता खत्म करने की मांग की और वेतन विसंगति दूर करने के लिए केंद्रीय वेतनमान, डीएड प्रशिक्षित को बीएड कराने, पूर्व सेवा की गणना कर पेंशन लाभ देने तथा भर्ती पदोन्नति नियम 2026 को निरस्त करने की मांग प्रमुखता से उठाई है।
शिक्षक मोर्चा के अहम संगठक शालेय शिक्षक संघ के प्रांतीय पदाधिकारी सुनील सिंह, विष्णु शर्मा, डॉ सांत्वना ठाकुर, सत्येंद्र सिंह, विवेक शर्मा, गजराज सिंह, राजेश शर्मा, शैलेश सिंह, प्रह्लाद जैन, सन्तोष मिश्रा, सन्तोष शुक्ला, शिवेंद्र चंद्रवंशी, दीपक वेंताल, यादवेंद्र दुबे, सर्वजीत पाठक, मंटू खैरवार, पवन दुबे, नंदकुमार अठभैया, भोजराम पटेल, विनय सिंह, आशुतोष सिंह, भानु डहरिया, रवि मिश्रा,बिजेंद्रनाथ यादव, जितेंद्र गजेंद्र, अजय वर्मा, कृष्णराज पांडेय, घनश्याम पटेल, बुध्दहेश्वर शर्मा, प्रदीप पांडेय, उपेंद्र सिंह, पवन साहू, मनोज पवार, देवव्रत शर्मा, कैलाश रामटेके, अब्दुल आसिफ खान, सरवर हुसैन, कुलदीप सिंह चौहान, नेमीचंद भास्कर, राजेश यादव, अमित सिन्हा, विक्रम राजपूत, सुशील शर्मा, विजय जाटवर, शशि कठोलिया, विजय बेलचंदन, अशोक देशमुख, तिलक सेन, द्वारिका भारद्वाज आदि पदाधिकारियों ने सरकार से उपरोक्त मांगों पर जल्द से जल्द निर्णय लेने की मांग की है।



