विश्व आदिवासी दिवस को लेकर सियासत तेज, कांग्रेस ने साय सरकार के खिलाफ पारित किया निंदा प्रस्ताव

रायपुर। राजीव भवन में बुधवार को आयोजित आदिवासी कांग्रेस कार्यकारिणी समिति एवं आदिवासी सलाहकार परिषद की बैठक में साय सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक में आदिवासी समाज के जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों के मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा और आने वाले समय में संगठन स्तर पर बड़े आंदोलन की रूपरेखा भी बनाई गई। जल-जंगल-जमीन की लड़ाई में कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी उतरेंगे।
बता दें कि बैठक में आदिवासी क्षेत्रों में संसाधनों के असंतुलित दोहन से उत्पन्न पर्यावरणीय संकट और उससे प्रभावित हो रहे आदिवासी समुदाय के अधिकारों और हितों पर भी मंथन किया गया। साथ ही आदिवासी समाज की आवाज को मजबूती से उठाने और संगठन को जमीनी स्तर पर और सशक्त बनाने को लेकर विचार-विमर्श किया गया।
विश्व आदिवासी दिवस नहीं मनाने पर निंदा प्रस्ताव
बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राज्य सरकार की ओर से कोई आयोजन नहीं किए जाने को लेकर निंदा प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया गया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राज्य की करीब 32 प्रतिशत आदिवासी आबादी वाले प्रदेश में मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और भाजपा नेताओं ने विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी समाज को बधाई देने की औपचारिकता तक नहीं निभाई।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस महज कोई राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, संस्कृति, गौरव और एकता से जुड़ा महत्वपूर्ण दिवस है। आरएसएस आदिवासी संस्कृति को स्वतंत्र सभ्यता मानने का विरोध करती है। वह आदिवासियों को आज भी पिछलग्गू बनाकर रखना चाहती है। भाजपा आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन पर से अधिकार को छीनने आदिवासियों को आदिवासी नहीं वनवासी बताती है। वह जल, जंगल, जमीन को अपने उद्योगपति मित्रों को सौंपना चाहती है।
बैठक में आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू, आदिवासी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जनक ध्रव, डॉ. शिवकुमार डहरिया और अमरजीत भगत, विधायक, पूर्व विधायक सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता के साथ पदाधिकारी मौजूद रहे।



