विकास की खबर: मुख्यमंत्री साय ने सुपेबेड़ा जलप्रदाय योजना के लिए मंजूर किए 7 करोड़, तेल नदी पर बनेगा 300 मीटर लंबा एनीकट

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग क्षेत्र के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुपेबेड़ा सामूहिक जलप्रदाय योजना को हमेशा चालू रखने के लिए 7 करोड़ रुपये के एनीकट निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह नया एनीकट इस पूरी पेयजल योजना के लिए एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम की तरह काम करेगा। इस फैसले से सुपेबेड़ा और आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को अब गर्मी के दिनों में भी पीने के पानी की किल्लत से नहीं जूझना पड़ेगा। तेल नदी पर एनीकट बनने से वहां सालभर पानी जमा रहेगा, जिससे क्षेत्र का वाटर लेवल भी काफी सुधर जाएगा।
सूखने वाली तेल नदी में अब छह महीने बना रहेगा जलभराव
गरियाबंद के सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सुपेबेड़ा सामूहिक जलप्रदाय योजना का काम पिछले सात सालों से कछुआ गति से चल रहा था। साल 2024 में जल जीवन मिशन के तहत इस योजना के लिए 8 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य तेल नदी के पानी को फिल्टर करके 9 गांवों के 2074 परिवारों तक हर दिन प्रति व्यक्ति 55 लीटर साफ पानी पहुंचाना है। इसके लिए नदी के किनारे 21 मीटर ऊंचा एक इंटेक वेल भी बनाया जा रहा है। दिक्कत यह थी कि तेल नदी सिर्फ छह महीने ही बहती है और बाकी समय इसका अधिकांश हिस्सा सूखी रेत में बदल जाता है। इस बड़ी चुनौती से निपटने के लिए दो साल पहले 2 करोड़ की लागत से एक छोटी दीवार बनाई गई थी, लेकिन वह फेल साबित हुई। अब 7 करोड़ की लागत से बनने वाला यह एनीकट नदी के पानी को रोककर रखेगा, जिससे इंटेक वेल के आसपास हमेशा नमी और पानी मौजूद रहेगा।
जनप्रतिनिधियों ने जताया आभार, क्षेत्र के लिए संजीवनी है यह योजना
इस बड़ी प्रशासनिक मंजूरी के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर कश्यप और प्रभावित क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य देशबंधु नायक ने देवभोग की जनता की तरफ से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार जताया है। दोनों ही जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह योजना सुपेबेड़ा क्षेत्र के लिए किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है क्योंकि इस इलाके के लोग लंबे समय से शुद्ध पेयजल के लिए परेशान रहे हैं। सिंचाई विभाग गरियाबंद के ईई एसके बर्मन ने बताया कि यह नया एनीकट लगभग 300 मीटर लंबा और 3 मीटर ऊंचा होगा। इसका निर्माण आधुनिक डायफ्राम वॉल तकनीक से किया जाएगा ताकि पानी का रिसाव न हो। इस एनीकट के बनने से केवल पीने का पानी ही नहीं मिलेगा, बल्कि आसपास के किसानों को रबी और खरीफ के सीजन में खेती और बागवानी के लिए भी सालभर सिंचाई की सुविधा मिल सकेगी। विभाग के मुताबिक योजना का 85 फीसदी काम पूरा हो चुका है और इस साल के अंत तक घरों में सप्लाई शुरू हो जाएगी।



