खैरागढ़ नगर पालिका पर बड़ा सवाल, कागजों में पिपरिया, जमीन पर कहीं और बना बाजार

खैरागढ़। नगर पालिका परिषद खैरागढ़ एक बार फिर अनियमितताओं के आरोपों में घिर गई है, जहां विकास कार्यों से ज्यादा भुगतान और खरीदी में गड़बड़ियों ने सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार की पौनी पसारी योजना के तहत 2019-20 में पिपरिया वार्ड और इतवारी बाजार वार्ड में बाजार निर्माण का प्रस्ताव पास हुआ था, लेकिन जमीनी हकीकत अलग निकली। दस्तावेजों में बाजार निर्माण का स्थान पिपरिया दर्ज रहा, जबकि वास्तविक निर्माण करीब चार किलोमीटर दूर इतवारी बाजार में कर दिया गया। सितंबर 2021 में टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई, फरवरी 2022 में अनुबंध हुआ और तीन महीने में निर्माण पूरा कर भुगतान भी कर दिया गया।

बिना सक्षम अनुमति के स्थल परिवर्तन और उसी आधार पर भुगतान होने से पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस गड़बड़ी का सीधा नुकसान पिपरिया वार्ड के लोगों को हुआ, जो आज भी सड़क किनारे कारोबार करने को मजबूर हैं।
36 लाख की मशीन बंद, पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
नगर पालिका में यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले बरेठपारा वार्ड में नाली और सीसी रोड निर्माण में भी स्थल बदलने के आरोप लग चुके हैं। 2021 में खरीदी गई 1000 किलोग्राम क्षमता की करीब 36 लाख रुपये की कंपोस्ट मशीन भी विवादों में है, जो आज तक चालू नहीं हो सकी।
मशीन बंद होने के बावजूद मरम्मत के नाम पर भुगतान किए जाने के आरोप सामने आए हैं, जिससे वित्तीय अनियमितताओं की आशंका और गहरी हो गई है।
खरीदी प्रक्रिया में भी खामियां उजागर हुई हैं, जहां निविदा समिति में पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं और सीएमओ की भूमिका सीमित बताई जा रही है। टैक्स कटौती और अन्य नियमों की अनदेखी ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं से नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।



