आतंक पर चोट, विकास पर जोर: सावलकोट पनबिजली परियोजना के लिए 5129 करोड़ का टेंडर जारी

रामबन। सिंधु जल संधि को निलंबित करने के बाद भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में जल संसाधनों के दोहन और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनएचपीसी ने चिनाब नदी पर बनने वाली 1856 मेगावाट की सावलकोट हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए 5129 करोड़ रुपये का टेंडर जारी कर दिया है। यह परियोजना न केवल जम्मू-कश्मीर की बिजली जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि राष्ट्रीय ग्रिड को भी मजबूती प्रदान करेगी।
एनएचपीसी द्वारा जारी टेंडर दस्तावेजों के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट को एक ही पैकेज के तहत विकसित किया जाएगा। इसमें डाइवर्जेंट टनल, कोफर डैम, मांडिया नाला डीटी, राइट बैंक स्पाइरल टनल और डैम से जुड़े अन्य सहायक निर्माण कार्य शामिल हैं। परियोजना के लिए बोली प्रक्रिया 12 मार्च से शुरू होकर 20 मार्च तक चलेगी। निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए 3285 दिनों यानी लगभग नौ वर्षों की समयसीमा निर्धारित की गई है।
भारत का यह कदम रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का कड़ा फैसला लिया था। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी, जिसके बाद सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि सीमा पार आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय संधियां एक साथ नहीं चल सकतीं। चिनाब नदी पर इस विशाल परियोजना की शुरुआत भारत के जल अधिकारों के पूर्ण उपयोग की दिशा में एक सशक्त संदेश है।
उल्लेखनीय है कि 1960 की सिंधु जल संधि के तहत पश्चिमी नदियों का अधिकांश पानी पाकिस्तान को आवंटित किया गया था, लेकिन भारत को इन नदियों पर जलविद्युत उत्पादन जैसे गैर-उपभोगीय कार्यों की अनुमति प्राप्त है। वर्तमान तनावपूर्ण स्थिति में भारत ने स्पष्ट रुख अपनाया है कि जब तक आतंकवाद पर लगाम नहीं लगती, वह इस संधि से जुड़े किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव को स्वीकार नहीं करेगा। सा



