बिलासपुर प्लेस ऑफ सेफ्टी घटना पर बाल आयोग सख्त, सुरक्षा व्यवस्था और फरार बालकों की खोज के दिए निर्देश

रायपुर। बिलासपुर स्थित प्लेस ऑफ सेफ्टी (विशेष गृह) से चार विधि-विरुद्ध बालकों के फरार होने और सुरक्षा कर्मी की हत्या की गंभीर घटना पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने तत्काल संज्ञान लिया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने संबंधित अधिकारियों के साथ ऑनलाइन समीक्षा बैठक कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की और फरार बालकों की शीघ्र खोज के निर्देश दिए।
आयोग ने बताया कि डॉ. वर्णिका शर्मा ने 6 दिसंबर 2025 को बिलासपुर प्लेस ऑफ सेफ्टी का औचक निरीक्षण किया था। उस दौरान आवास, भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य, सुरक्षा, स्टाफ की उपलब्धता, काउंसलिंग और पुनर्वास व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण में पेयजल, भोजन, स्टाफ की कमी और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई कमियां सामने आने पर अधिकारियों को समयबद्ध सुधार के निर्देश दिए गए थे।
13 जुलाई 2026 को हुई घटना के बाद आयोजित समीक्षा बैठक में डॉ. शर्मा ने पहले दिए गए निर्देशों के अनुपालन की स्थिति की समीक्षा करते हुए संस्था की सुरक्षा व्यवस्था का दोबारा व्यापक मूल्यांकन कर तत्काल आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) की अधिकारी रश्मीत कौर को निर्देशित किया कि फरार चारों बालकों की उपलब्ध सभी जानकारियां जुटाकर उनके संभावित ठिकानों और संपर्क सूत्रों के आधार पर विशेष टीम गठित कर प्रभावी खोज अभियान चलाया जाए।
आयोग अध्यक्ष ने जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ), जिला बाल संरक्षण अधिकारी (डीसीपीओ) और किशोर न्याय बोर्ड (JJB) के अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे गंभीर मामलों में शासन को मौखिक सूचना के साथ-साथ विस्तृत लिखित प्रतिवेदन भी अनिवार्य रूप से भेजा जाए।
आयोग ने संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की है। इसमें संस्था की क्षमता, वर्तमान में रह रहे बच्चों की संख्या, काउंसलरों की उपलब्धता और उनकी योग्यता, सुरक्षा व्यवस्था में किए गए सुधार, घटना के बाद की कार्रवाई तथा भविष्य की कार्ययोजना का तथ्यात्मक विवरण प्रस्तुत करने को कहा गया है।
डॉ. वर्णिका शर्मा ने निर्देश दिए कि प्रत्येक बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक आवश्यकताओं का गंभीरता से आकलन किया जाए तथा जरूरत के अनुसार काउंसलिंग और पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि बाल देखरेख संस्थाओं में सुरक्षा, पारदर्शिता, जवाबदेही और संवेदनशील कार्यप्रणाली सुनिश्चित करना सभी संबंधित विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है। आयोग इस पूरे प्रकरण की नियमित निगरानी करता रहेगा।


