प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से बदली छत्तीसगढ़ के गांवों की सूरत, 7 हजार से अधिक ग्रामीणों को मिला रोजगार और सरकारी मदद

छत्तीसगढ़ में खेती-किसानी के साथ-साथ अब मछली पालन (Fish Farming) भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक बड़ा जरिया बन चुका है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में चलाई जा रही प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के जरिए हजारों ग्रामीण और किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं। आधुनिक तकनीक और सरकारी मदद से यह पारंपरिक व्यवसाय अब एक मुनाफेदार बिजनेस का रूप ले चुका है।

जशपुर जिले ने बनाया मछली उत्पादन का नया कीर्तिमान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गृह जिले जशपुर से मछली पालन को लेकर बेहद शानदार आंकड़े सामने आए हैं। इस जिले में योजना का सबसे बेहतरीन असर देखने को मिला है। पिछले 22 महीनों के भीतर जशपुर जिले ने 22,805 मीट्रिक टन मछली उत्पादन का एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। इस बड़ी कामयाबी से जिले के हजारों मत्स्य पालकों की कमाई में भारी बढ़ोतरी हुई है। स्थानीय स्तर पर ही अच्छी क्वालिटी के मछली बीज (Fish Seed) तैयार होने से उत्पादन की क्षमता और बढ़ गई है।
7 हजार से ज्यादा ग्रामीणों को मिला सरकारी योजनाओं का लाभ मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए जशपुर जिले में ग्रामीण इलाकों के 77 हेक्टेयर से ज्यादा तालाबों और करीब 295 हेक्टेयर जलाशयों (Water Bodies) को पट्टे पर आवंटित किया गया है। अब तक जिले के 7,000 से अधिक लाभार्थियों को इस योजना से सीधा लाभ मिला है। इन्हें सरकार की तरफ से नाव, जाल, फिंगरलिंग (मछली के बच्चे), मछली बीमा और बाजार में बिक्री के लिए जरूरी सहायता दी जा रही है।
आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों पर मिल रहा है 60% तक अनुदान पारंपरिक तरीके से हटकर अब वैज्ञानिक ढंग से मछली पालन करने के लिए ग्रामीणों को मोटी सब्सिडी दी जा रही है। नए तालाबों के निर्माण, पौंड लाइनर और बायोफ्लॉक यूनिट (कम जगह में ज्यादा मछली पालने की आधुनिक तकनीक) लगाने के लिए सरकार की तरफ से 60 प्रतिशत तक का अनुदान (Subsidy) दिया जा रहा है। इस वैज्ञानिक तरीके से मछली पालने की लागत कम आ रही है और उत्पादन कई गुना बढ़ गया है।
दूसरे राज्यों में जाकर ट्रेनिंग ले रहे हैं छत्तीसगढ़ के किसान मछली पालकों को नई और उन्नत तकनीकों की जानकारी देने के लिए सरकार उन्हें देश के अलग-अलग राज्यों में एक्सपोजर विजिट (अध्ययन दौरे) पर भेज रही है। इन दौरों के जरिए गांव के किसान और महिला स्वयं सहायता समूह (Self Help Groups) के सदस्य मछली पालन के नए तौर-तरीके, बीज प्रबंधन, मछलियों की बीमारियों पर काबू पाना और उनके सही चारे के बारे में बारीकी से सीख रहे हैं। इस ट्रेनिंग से गांवों के लोग अब ज्यादा जागरूक और आत्मनिर्भर हो रहे हैं।



