सुशासन तिहार में मुख्यमंत्री अचानक पहुंचे आत्मसमर्पित दंपत्ति की दुकान, खरीदी पानी की बोतल, बढ़ाया हौसला

बीजापुर। सुशासन तिहार 2026 के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का एक मानवीय और प्रेरणादायक पहलू उस समय देखने को मिला, जब उनका काफिला सुदूर वनांचल क्षेत्र के ग्राम कोण्डापल्ली में अचानक एक छोटी किराना दुकान के सामने रुक गया। यह दुकान आत्मसमर्पित दंपत्ति मासा तामो और जयमोती की थी, जिन्होंने कभी नक्सल संगठन का रास्ता चुना था, लेकिन अब मेहनत और आत्मनिर्भरता के बल पर नई जिंदगी जी रहे हैं।

मुख्यमंत्री दुकान के भीतर पहुंचे और दंपत्ति से आत्मीय बातचीत की। उन्होंने दुकान से पानी की बोतल खरीदी और दोनों के संघर्ष व बदलाव की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भरता ही नए जीवन की सबसे बड़ी पहचान है और सरकार ऐसे लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है।
मासा तामो और जयमोती की कहानी संघर्ष से भरी रही है। गरीबी, अभाव और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण दोनों अलग-अलग समय में नक्सली संगठन से जुड़ गए थे। वर्ष 2021 में दोनों का विवाह हुआ। बाद में उन्होंने महसूस किया कि हिंसा का रास्ता उनके और आने वाली पीढ़ी के भविष्य के लिए सही नहीं है। आखिरकार अक्टूबर 2025 में दोनों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
बीजापुर पुनर्वास केंद्र में उन्हें नई शुरुआत का अवसर मिला। यहां उन्हें शिक्षा, कौशल विकास प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ मिला। राशन कार्ड, आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज बनाए गए। महिला एवं बाल विकास विभाग की सक्षम योजना के तहत जयमोती को एक लाख रुपये का ऋण मिला, जिससे उन्होंने कोण्डापल्ली में किराना दुकान शुरू की।
आज यह दुकान उनके परिवार की आय का मुख्य स्रोत बन चुकी है। दंपत्ति का कहना है कि अब उनके हाथों में हथियार नहीं, बल्कि मेहनत की कमाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कहानी केवल दो लोगों की नहीं, बल्कि बदलते बस्तर और सफल पुनर्वास मॉडल की जीवंत तस्वीर है। यह साबित करता है कि अवसर और विश्वास मिलने पर कोई भी व्यक्ति सम्मानजनक जीवन की ओर लौट सकता है।


