सुशासन तिहार 2026: कोण्डापल्ली का बेली ब्रिज बना बदलते बस्तर की नई पहचान, मुख्यमंत्री ने किया निरीक्षण

रायपुर/बीजापुर। कभी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विकास से दूर रहे बस्तर के इलाकों में अब आधुनिक अधोसंरचना नई तस्वीर पेश कर रही है। सुशासन तिहार 2026 के तहत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र स्थित कोण्डापल्ली पहुंचकर बीजापुर-पूवर्ती मार्ग पर निर्मित बेली ब्रिज का निरीक्षण किया।

मुख्यमंत्री ने पुल की निर्माण तकनीक, उपयोगिता और क्षेत्रीय विकास में उसकी भूमिका की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने कहा कि सड़क, पुल और अन्य आधारभूत सुविधाएं केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि ये दूरस्थ क्षेत्रों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का मजबूत माध्यम हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य विकास की पहुंच अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित करना है।
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि भारतीय सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा निर्मित यह बेली ब्रिज बीजापुर-पूवर्ती सड़क परियोजना का अहम हिस्सा है। बेली ब्रिज तकनीक पारंपरिक पुलों की तुलना में अधिक मजबूत, किफायती और टिकाऊ मानी जाती है। इन पुलों का निर्माण सामान्य पुलों की तुलना में लगभग पांच गुना कम लागत में और बहुत कम समय में किया जा सकता है। दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित Connectivity स्थापित करने के लिए यह तकनीक बेहद प्रभावी साबित हो रही है।
जानकारी के अनुसार बीजापुर जिले में अब तक 21 बेली ब्रिजों का निर्माण किया जा चुका है। इन पुलों के बनने से दूरस्थ गांवों तक आवागमन आसान हुआ है। ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा संस्थानों, बाजारों और अन्य जरूरी सुविधाओं तक पहुंचने में बड़ी राहत मिली है। इससे क्षेत्र में Development Projects को भी नई गति मिली है।
मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों की मेहनत और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य के श्रमिक और युवा ही विकास यात्रा के वास्तविक निर्माता हैं। उनका योगदान नए छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोण्डापल्ली का यह बेली ब्रिज केवल एक पुल नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और सुशासन का प्रतीक है। यह बदलते बस्तर की उस नई पहचान को दर्शाता है, जहां अब विकास की रोशनी दूरस्थ गांवों तक तेजी से पहुंच रही है।


