नंदीग्राम में प्रतिष्ठा की लड़ाई: सुवेंदु अधिकारी बनाम पूर्व सहयोगी, चार दलों में कांटे की टक्कर

पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र में इस बार का चुनाव विशेष रूप से चर्चित हो गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी फिर से इस सीट से प्रत्याशी हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने उनके खिलाफ उनके पूर्व सहयोगी पवित्र कर को मैदान में उतारा है। पवित्र कर ने हाल ही में भाजपा छोड़कर टीएमसी का दामन थामा था।
2021 के विधानसभा चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने इस सीट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 1,956 वोटों से पराजित किया था। इस बार ममता बनर्जी भवानीपुर से चुनाव लड़ रही हैं, जहां भी सुवेंदु अधिकारी प्रत्याशी हैं। ऐसे में दोनों सीटों पर उनकी प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
नंदीग्राम सीट पर इस बार चार प्रमुख दलों के प्रत्याशी मैदान में हैं। टीएमसी ने पवित्र कर को प्रत्याशी बनाया है, जबकि भाजपा से सुवेंदु अधिकारी चुनाव लड़ रहे हैं। वाम मोर्चा ने यह सीट अपनी सहयोगी भाकपा को दी है, जिसने शांतिरंजन गिरी को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा इस्लामिक सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) ने मोहम्मद सबेमिराज अली खान को प्रत्याशी घोषित किया है।
नंदीग्राम का राजनीतिक महत्व
नंदीग्राम पूर्व मेदिनीपुर जिले में स्थित है और सुवेंदु अधिकारी परिवार का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। यह सीट 1967 में अस्तित्व में आई और तमलुक लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। यहां कुल 2.75 लाख मतदाता हैं, जो 286 मतदान केंद्रों पर फैले हैं। 2021 में यहां 88.55 प्रतिशत मतदान हुआ था।
यह क्षेत्र 2007 में भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर सुर्खियों में आया था, जब वाममोर्चा सरकार ने यहां रासायनिक हब स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था। इस विरोध आंदोलन ने वाममोर्चा को कमजोर किया और टीएमसी को सत्ता में आने में सहायता प्रदान की। तब से यह सीट बंगाल की राजनीति में प्रतीकात्मक महत्व रखती है।
2021 का चुनाव और मौजूदा मुद्दे
2021 के चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने 1,10,764 वोट (48.49 प्रतिशत) प्राप्त कर जीत दर्ज की थी, जबकि ममता बनर्जी को 1,08,808 वोट (47.64 प्रतिशत) मिले थे। वाममोर्चा का वोट प्रतिशत 2.74 प्रतिशत तक सिमट गया था।
इस बार का चुनाव ग्रामीण बुनियादी ढांचे, सड़क, पेयजल, जल निकासी और सिंचाई जैसे अनसुलझे मुद्दों के इर्द-गिर्द घूम रहा है। 700 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के बावजूद स्थानीय लोगों में अपेक्षित सुधार को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। किसान बंजर भूमि के लिए मुआवजा और मछुआरे पट्टे की मांग कर रहे हैं। पिछले दो दशकों में इस सीट पर राजनीतिक समीकरण बार-बार बदले हैं, और इस बार भी यहां का जनादेश सभी की निगाहों में है।




