छत्तीसगढ़ विधानसभा में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग का बजट पारित, पर्यटन विकास के लिए 492 करोड़ का प्रावधान

रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज पर्यटन, संस्कृति, पुरातत्व तथा धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित कर दी गईं। विभागीय मंत्री राजेश अग्रवाल ने बजट पर चर्चा का उत्तर देते हुए कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक आस्था को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। विभागों के लिए कुल 492 करोड़ 20 लाख रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
पर्यटन विभाग के लिए 344 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। मंत्री अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के तहत प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों और सर्किटों को विकसित किया जाएगा, जिसके लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से श्री रामलला दर्शन योजना के लिए 36 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसके माध्यम से अब तक 44 हजार से अधिक श्रद्धालु नि:शुल्क तीर्थ यात्रा कर चुके हैं। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ आस्था पथ (शक्तिपीठ भ्रमण) योजना के तहत प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों को आपस में जोड़कर धार्मिक पर्यटन को नई दिशा दी जाएगी।
बजट में साहसिक और जल पर्यटन के विकास के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं भोरमदेव कॉरिडोर, मयाली-बगीचा रिसॉर्ट और सिरपुर को बुद्धिष्ट हेरिटेज स्थल के रूप में विकसित करने के लिए भी विशेष राशि तय की गई है। नया रायपुर में चित्रोत्पला फिल्म सिटी और कन्वेंशन सेंटर का निर्माण भी प्रस्तावित है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री जन-पर्यटन प्रोत्साहन योजना के तहत नागरिकों को 75 प्रतिशत सब्सिडी पर राज्य के पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जाएगा, जिसकी शुरुआत रायपुर से जगदलपुर और बारनवापारा-सिरपुर मार्ग से होगी। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए प्रमुख शहरों में रोड शो और बिजनेस मीटिंग्स का आयोजन भी किया जाएगा।
संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के लिए 98 करोड़ 20 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। मंत्री ने कहा कि राज्य की जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने के लिए राजकीय मानव संग्रहालय, इतिहास संग्रहालय और अभिलेखागार का निर्माण कार्य जारी है। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि बस्तर पंडुम 2025 को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया है, जो प्रदेश की सांस्कृतिक गौरव को दर्शाता है। विभागीय बजट में धार्मिक न्यास तथा धर्मस्व विभाग के लिए भी 50 करोड़ रुपये रखे गए हैं।



